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छत्तीसगढ़ : ‘खुशी’ ने लाया ‘आनंद’, उदंती सीतानदी टाइगर प्रोजेक्ट में वन भैंसा खुशी ने दिया बच्चे को जन्म

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छत्तीसगढ़ में लगातार घट रही वनभैंसा की संख्या से चिंतित वन विभाग को लंबे समय के बाद उदंती सीतानदी टाइगर प्रोजेक्ट से बड़ी खुशी की खबर मिली है। मंगलवार की रात करीब दो बजे उदंती सीतानदी टाइगर प्रोजेक्ट में छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसा खुशी ने एक नर बच्चे को जन्म दिया है। इसका नाम आनंद रखा गया है। बच्चे के जन्म से पूरे उदंती अभयारण्य में खुशी का माहौल है। यहां के प्रभारी अधिकारी रमेश रायस्त ने बताया कि दिल्ली से आए विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम की मौजूदगी में बीती रात दो बजे वनभैंसा का प्रसव हुआ है। पहले संभावना थी कि अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में प्रसव होगा। लेकिन पहले सप्ताह में ही हो गया। उन्होंने बताया कि प्रसव के बाद बच्चा और मां दोनों स्वस्थ हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा दोनों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया है।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में वनभैंसा को राजकीय पशु का दर्जा दिया गया है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष ध्यान देते हुए अलग से बजट भी स्वीकृत किया गया है। इसके बाद भी वनभैंसा की घटती संख्या सरकार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। वर्तमान में लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके वन भैंसा की संख्या उदंती अभयारण्य में 11 हो गई है। पहले 10 थी जिसमें दो मादा वनभैंसा आशा और खुशी के अलावा आठ नर वनभैंसा थे। इसमें खुशी नाम की वनभैंसा ने ही एक बच्चे को जन्म दिया है। जिसके बाद अभयारण्य में अब नर वनभैंसा की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है। जानकारी के मुतातिक वनभैंसा आशा अब उम्रदराज हो चुकी है जिसके चलते उसमें प्रजनन क्रिया की अब संभावना नहीं है। परंतु उससे जन्मी खुशी से वन विभाग वनभैंसा वंशवृद्धि की आस लगाए हुए हैं।

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दिल्ली से आए विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम की मौजूदगी में मंगलवार रात दो बजे वनभैंसा खुशी का प्रसव हुआ है। पहले संभावना थी कि अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में प्रसव होगा। लेकिन पहले सप्ताह में ही हो गया। प्रसव के बाद बच्चा और मां दोनों स्वस्थ हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा दोनों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया है।

रमेश रायस्त, प्रभारी अधिकारी उदंती सीतानदी टाइगर प्रोजेक्ट