आज से कई साल पहले Tata Nano को भारत की सबसे सस्ती कार के तौर पर लॉन्च किया गया था. इसकी लॉन्चिंग के पीछे बड़ी वजह यही थी कि जो लोग बाइक चलाते हैं, वो कम कीमत में एक अच्छी कार पर शिफ्ट हो जाएं.
लॉन्च के समय इस कार को लेकर काफी एक्साइटमेंट थी और इसे आम आदमी की कार कहा गया. इतनी ज्यादा चर्चा और अच्छी बुकिंग के बावजूद यह कार बाजार में सफल नहीं हो पाई और कुछ ही सालों में इसका प्रोडक्शन बंद करना पड़ा. आइए जानते हैं कि आखिर इतनी खास होने के बाद भी यह कार क्यों फेल हो गई?
ये थी गाड़ी के बंद होने के पीछे वजह
सबसे बड़ा कारण इसकी इमेज थी. इस कार को दुनिया की सबसे सस्ती कार कहा गया. ऐसे में लोगों के मन में यह धारणा बन गई कि यह गरीबों की कार है. भारत जैसे देश में लोग कार को सिर्फ सफर का साधन नहीं बल्कि एक स्टेटस सिंबल भी मानते हैं. इसलिए बहुत से लोग सस्ती कार खरीदने के बजाय थोड़ी महंगी सेकेंड हैंड कार लेना ज्यादा पसंद करते थे.
दूसरी बड़ी वजह इसकी क्वालिटी और सेफ्टी को लेकर चिंता थी. शुरुआती समय में कुछ कारों में आग लगने की खबरें आईं जिससे लोगों का भरोसा कम हो गया. इसके अलावा हल्की बॉडी और कम फीचर्स की वजह से लोगों को यह कार उतनी सेफ और मजबूत नहीं लगी.
इसके अलावा कंपनी ने इस कार को बहुत ज्यादा सस्ता बनाने के चक्कर में कई फीचर्स कम कर दिए, जिससे लोगों को यह कार कमजोर और कम क्वालिटी वाली लगने लगी. वहीं इसका डिजाइन और परफॉर्मेंस भी सभी ग्राहकों को आकर्षित नहीं कर पाया.
एक और बड़ी समस्या इसकी मार्केटिंग और टारगेट ग्राहक को लेकर थी. कंपनी ने सोचा था कि बाइक चलाने वाले लोग इस कार को खरीदेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जिन लोगों के पास बाइक थी, वे सीधे कार पर शिफ्ट नहीं हुए, और जो कार खरीद सकते थे, वे थोड़ा ज्यादा पैसा देकर बेहतर और बड़ी कार लेना चाहते थे.
इसके साथ ही लॉन्च के समय फैक्ट्री से जुड़ी समस्याएं, डिलीवरी में देरी और बढ़ते कॉम्पीटिशन ने भी इसकी बिक्री पर असर डाला. धीरे-धीरे इसकी मांग कम होती गई और आखिरकार 2018 में इसका प्रोडक्शन बंद करना पड़ा.
रतन टाटा का सपना रह गया अधूरा
माना जाता है कि टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने फैमिली के चार मेंबर को बाइक पर बैठकर सफर करते हुए देखा. ऐसे में उन्होंने एक ऐसी फैमिली कार बनाने की सोची जो सस्ती और सेफ हो. बस यहीं से टाटा नैनो का ख्याल आया, लेकिन गाड़ी के बंद होने के बाद यह सपना अधूरा ही रह गया.



