Home देश भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल समेत इन अहम फैक्टर्स’

भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल समेत इन अहम फैक्टर्स’

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भारतीय शेयर बाजारों में 28 सितंबर से शुरू सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत और कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

गांधी जयंती के मौके पर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में अवकाश रहेगा।

बीते सप्ताह सेंसेक्स में 399.22 अंक या 0.53 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी में 205.9 अंक या 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार, 25 सितंबर को सेंसेक्स 315.20 अंकों की वृद्धि के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ था। निफ्टी 77.40 अंकों की बढ़त के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ था।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है, ”अमेरिका-ईरान बातचीत में प्रगति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने से जुड़े किसी फ्रेमवर्क से ऊर्जा कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारत के आयात बिल और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।”

औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों और मैन्युफैक्चरिंग PMI पर नजर

घरेलू मोर्चे पर नए सप्ताह में अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े और HSBC मैन्युफैक्चरिंग PMI, बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों और गाड़ियों की बिक्री के मासिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। व्हीकल सेल्स डेटा 1 अक्टूबर को सामने आएगा।

ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर. का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सितंबर के नीतिगत फैसले के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। बॉन्ड यील्ड और डॉलर में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में निवेश प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण होगी। कच्चे तेल की खरीद के लिए डॉलर की मांग और विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव बना रह सकता है।

105-106 डॉलर प्रति बैरल कच्चा तेल भारत के लिए राहत देने वाला स्तर नहीं

पीटीआई के मुताबिक, HST Wealth के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 105-106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अभी राहत देने वाला स्तर नहीं है। अमेरिका-ईरान बातचीत में प्रगति से तेल की कीमतों में शामिल भू-राजनीतिक जोखिम कम हो सकता है, जबकि तनाव बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।