Bihar Next CM Face: बिहार की राजनीति इस वक्त बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? 14 अप्रैल को नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन की चर्चाओं ने पटना से दिल्ली तक हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, NDA खेमे में पांच नाम सबसे आगे चल रहे हैं। भाजपा इस बार ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और ‘जातिगत समीकरणों’ को ध्यान में रखकर अपना पत्ता खोल सकती है।
आइए एक-एक करके इन दावेदारों की प्रोफाइल और उनके सामाजिक समीकरण को समझते हैं।
- सम्राट चौधरी: ओबीसी राजनीति का बड़ा चेहरा (Samrat Choudhary)
बिहार के वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे मजबूत नाम माने जा रहे हैं। सम्राट चौधरी इस वक्त बिहार के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री हैं। लंबे समय से सक्रिय राजनीति में रहने वाले सम्राट चौधरी को संगठन और सरकार दोनों का अनुभव है।
राजनीतिक सफर: सम्राट चौधरी ने बहुत कम समय में भाजपा के भीतर अपनी पैठ बनाई है। वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में सरकार में गृह विभाग जैसा महत्वपूर्ण जिम्मा संभाल रहे हैं। तारापुर विधानसभा से विधायक सम्राट चौधरी को संगठन चलाने का लंबा अनुभव है।
जाति और ताकत: सम्राट चौधरी कुशवाहा (OBC) समाज से आते हैं। बिहार में ‘लव-कुश’ समीकरण में कुशवाहा वोट बैंक की बड़ी भूमिका है। नीतीश कुमार के पसंदीदा होने के साथ-साथ वे भाजपा के उस आक्रामक चेहरे के रूप में जाने जाते हैं जो विपक्ष को सीधे चुनौती देता है।
- संजीव चौरसिया: संगठन के पुराने और कर्मठ सिपाही (Sanjiv Chaurasia)
दीघा विधानसभा सीट से लगातार जीत दर्ज करने वाले संजीव चौरसिया का नाम भी मुख्यमंत्री की चर्चाओं में है। वे दीघा सीट से विधायक हैं और लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं।
राजनीतिक सफर: संजीव चौरसिया भाजपा के उन नेताओं में शुमार हैं जिन्होंने जमीन पर रहकर संगठन को मजबूत किया है। 2015 से लगातार विधायक के रूप में उनका प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। वे सादगी और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पहुंच के लिए जाने जाते हैं।
जाति और ताकत: संजीव चौरसिया OBC (चौरसिया समाज) से ताल्लुक रखते हैं। भाजपा उनके जरिए पिछड़ों और अति-पिछड़ों के बीच एक बड़ा संदेश दे सकती है। उनकी साफ-सुथरी छवि उन्हें इस रेस में एक ‘डार्क हॉर्स’ (अपेक्षित विजेता) बनाती है।
- जनक राम: दलित राजनीति का सशक्त हस्ताक्षर (Janak Ram)
अगर भाजपा किसी दलित चेहरे पर दांव लगाने का मन बनाती है, तो जनक राम सबसे पहली पसंद हो सकते हैं।
राजनीतिक सफर: गोपालगंज के पूर्व सांसद और वर्तमान में बिहार विधान परिषद सदस्य (MLC) जनक राम सरकार में एससी/एसटी कल्याण मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री भी रह चुके हैं। जनक राम की पहचान एक सौम्य लेकिन स्पष्टवादी दलित नेता की है।
जाति और ताकत: जनक राम अनुसूचित जाति (SC) से आते हैं। बिहार में दलित और महादलित वोट बैंक हमेशा निर्णायक भूमिका में रहता है। जनक राम को आगे बढ़ाकर भाजपा विपक्षी खेमे के दलित कार्ड को बेअसर करने की रणनीति अपना सकती है।
- श्रेयसी सिंह: युवा जोश और राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व (Shreyasi Singh)
बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का नाम इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला और ग्लैमरस है।
राजनीतिक सफर: अंतरराष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज और जमुई से विधायक श्रेयसी सिंह ने राजनीति में बहुत तेजी से अपनी जगह बनाई है। 2025 में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं, जिससे उन्हें एक बड़ी राजनीतिक विरासत मिली है।
जाति और ताकत: श्रेयसी सिंह राजपूत (सवर्ण) जाति से आती हैं। एक युवा महिला चेहरा, खिलाड़ी की बेदाग छवि और सवर्ण वोट बैंक का साथ-ये तीन चीजें उन्हें मुख्यमंत्री पद की रेस में मजबूती से खड़ा करती हैं। वे प्रधानमंत्री मोदी के ‘नारी शक्ति’ विजन का सटीक उदाहरण पेश करती हैं।
- धर्मशीला गुप्ता: वैश्य समाज और महिलाओं की आवाज (Dharamshila Gupta)
भाजपा की राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चाओं में बना हुआ है।
राजनीतिक सफर: दरभंगा से ताल्लुक रखने वाली धर्मशीला गुप्ता लंबे समय से भाजपा की सक्रिय सदस्य रही हैं। हाल ही में उन्हें सुशील मोदी की जगह राज्यसभा भेजा गया, जो दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व उन पर कितना भरोसा करता है। उनकी पकड़ खासतौर पर महिला मतदाताओं के बीच काफी मजबूत मानी जाती है।
जाति और ताकत: वे वैश्य समाज (Bania) से आती हैं, जो भाजपा का कोर वोट बैंक माना जाता है। बिहार में वैश्य समाज की आबादी और उनके व्यापारिक प्रभाव को देखते हुए धर्मशीला गुप्ता एक संतुलित विकल्प साबित हो सकती हैं।
क्या होगा भाजपा का ‘मास्टर स्ट्रोक’?
राजनीतिक घटनाक्रम के मुताबिक 13-14 अप्रैल के बीच NDA विधायक दल की बैठक हो सकती है, जिसमें नए नेता का चयन होगा। इसके बाद 15 अप्रैल को नई सरकार का गठन संभव माना जा रहा है। खरमास खत्म होने के बाद यह समय राजनीतिक रूप से शुभ भी माना जा रहा है। नीतीश कुमार के बाद बिहार को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो विकास के साथ-साथ एनडीए के कुनबे को एकजुट रख सके। सम्राट चौधरी जहां अनुभव में आगे हैं, वहीं श्रेयसी सिंह और जनक राम के जरिए भाजपा जातिगत प्रयोग कर सकती है। 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में ही इस सस्पेंस से पर्दा उठेगा कि बिहार का ताज किसके सिर सजेगा। बिहार में मुख्यमंत्री का चेहरा सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि पूरा राजनीतिक समीकरण होता है। जहां सम्राट चौधरी अनुभव और संगठन के दम पर आगे दिखते हैं, वहीं श्रेयसी सिंह और धर्मशीला गुप्ता जैसे चेहरे नए प्रयोग का संकेत देते हैं। जनकराम दलित समीकरण मजबूत कर सकते हैं, जबकि संजीव चौरसिया संगठन के भरोसेमंद विकल्प हैं। अब नजर NDA के अंतिम फैसले पर है। क्या पार्टी अनुभव को प्राथमिकता देगी या नए चेहरे के साथ बड़ा दांव खेलेगी? यही फैसला तय करेगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।



