बाजार में यह अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई दिग्गज कारोबारी किसी छोटी कंपनी पर हाथ रखता है, तो उसके शेयरों की किस्मत रातों-रात बदल जाती है. उद्योगपति गौतम अडानी के एक हालिया कदम ने कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है.
उनकी एक बड़ी डील का सीधा असर महज 17 रुपये के भाव वाले एक पावर शेयर पर पड़ा है और यह रॉकेट की तरह भागने लगा है. हम बात कर रहे हैं जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड (JP Power) की. अडानी समूह के एक फैसले ने इस शेयर में नई जान फूंक दी है, जिससे पिछले एक महीने में ही इसने अपने निवेशकों को 27 फीसदी का शानदार रिटर्न दे दिया है.
14,500 करोड़ की डील से अडानी का ‘मास्टरस्ट्रोक’
दरअसल, इस उछाल के पीछे एक बहुत बड़ा अधिग्रहण (Acquisition) है. इसी साल मार्च 2026 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अडानी एंटरप्राइजेज के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया. अडानी ग्रुप ने 14,535 करोड़ रुपये की सफल बोली लगाकर दिवालिया हो चुकी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) को खरीद लिया है.
अब सवाल उठता है कि JAL के बिकने से जेपी पावर के शेयरों में क्यों आग लगी है? वजह बिल्कुल साफ है. जयप्रकाश एसोसिएट्स असल में जेपी पावर की पैरेंट (प्रमोटर) कंपनी है और इसमें उसकी 24 फीसदी हिस्सेदारी है. इस डील के पूरा होने का सीधा मतलब यह है कि जेपी पावर के जितने भी थर्मल और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट हैं, उन पर अब परोक्ष रूप से अडानी ईकोसिस्टम का नियंत्रण हो गया है. इसी मजबूत बैकअप की खबर ने बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा दिया है.
आंकड़ों में समझिए शेयर की कहानी
बाजार के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो जेपी पावर का शेयर 17.0 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है. अडानी की एंट्री की खबर से इस शेयर में भारी खरीदारी हो रही है. कंपनी का कुल मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) अब 11,658 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
शेयर के रिटर्न की बात करें तो बीते एक हफ्ते के भीतर ही इसने लगभग 12 फीसदी (11.99%) की छलांग लगाई है. वहीं, एक महीने में यह 27 फीसदी तक उछल चुका है. पिछले एक साल का हिसाब देखें, तो इस शेयर ने निवेशकों को 16.49 फीसदी का मुनाफा कमा कर दिया है. इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 27.70 रुपये और निचला स्तर 12.52 रुपये रहा है.
क्या करती है जेपी पावर ?
साल 1994 में स्थापित जयप्रकाश पावर वेंचर्स मुख्य तौर पर बिजली उत्पादन, कोयला व रेत खनन और सीमेंट ग्राइंडिंग के कारोबार से जुड़ी है. कंपनी के पास कुल 2220 मेगावाट (MW) बिजली पैदा करने की क्षमता है. इसके पास देश में तीन प्रमुख पावर प्लांट हैं:
- विष्णुप्रयाग हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट (400 MW): उत्तराखंड में स्थित यह प्लांट साल 2007 से काम कर रहा है.
- जेपी बीना थर्मल पावर प्लांट (500 MW): मध्य प्रदेश के सागर जिले में मौजूद इस प्लांट में 250-250 मेगावाट की दो इकाइयां हैं.
- जेपी निगरी सुपरक्रिटिकल थर्मल प्लांट (1320 MW): सिंगरौली (मध्य प्रदेश) में स्थित इस बड़े प्लांट में 660-660 मेगावाट की दो इकाइयां काम कर रही हैं.
कंपनी ने अपनी कुल क्षमता में से 1245 मेगावाट बिजली बेचने के लिए पहले से पक्के करार (PPA) किए हुए हैं, जबकि बाकी बिजली शॉर्ट-टर्म के आधार पर बेची जाती है. इसके अलावा, प्लांट को चलाने के लिए कंपनी के पास अमेलिया कोयला खदान से 3.92 मिलियन टन कोयला निकालने की क्षमता और बीना प्लांट के लिए 1.5 मिलियन टन का फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट भी मौजूद है.
बाजार के जानकारों का मानना है कि जेपी पावर के पास पहले से ही बेहतरीन प्लांट और ढांचा मौजूद है. अब अडानी ग्रुप जैसी आर्थिक रूप से मजबूत कंपनी का साथ मिलने से इसके कामकाज में तेजी से सुधार आएगा. लंबे समय में कंपनी का कर्ज कम होने और मुनाफे में इजाफा होने की पूरी उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा उन छोटे निवेशकों को मिलेगा जिन्होंने इस शेयर पर अपना भरोसा जताया है.



