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“Owaisi Attack Modi Govt: ‘जो काम भारत को करना था, वो आतंक फैलाने वाले मुल्क ने किया…’, मोदी सरकार पर ओवैसी का प्रहार”

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Iran-US War: ईरान-अमेरिका जंग में सुलह कराने में पाकिस्तान के रोल को लेकर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार को जमकर घेरा. ओवैसी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि जो काम भारत को करना चाहिए था, वो आतंक फैलाने वाले मुल्क ने किया.

ओवैसी ने कहा, ‘ईरान हमसे ज्यादा करीब है, हमें बहुत दुख है कि सीजफायर में भारत क्यों अपना रोल अदा नहीं कर सका, हमारा पड़ोसी देश, जो आतंकवाद फैलाता है, उसने यह काम किया. भारत को यह रोल अदा करना था.’ ओवैसी ने आगे कहा, ‘बीजेपी सिर्फ 3 घंटे की पिक्चर दिखाकर देशवासियों को खुश करना चाह रही है.’

जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने जताई खुशी

दूसरी ओर, जम्मू और कश्मीर के बड़े राजनीतिक दिग्गजों ने अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्त के सीजफायर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी. कुछ ने खुशी जताई, कुछ ने सावधानी भरी उम्मीद दिखाई, और कुछ ने शक जाहिर किया. यह सीजफायर 40 दिनों के तनावपूर्ण संघर्ष के बाद हुआ, जिसने दुनिया के एनर्जी मार्केट्स को हिलाकर रख दिया था और एक बड़ी जंग का डर पैदा कर दिया था.

महबूबा बोलीं- अल्लाह का शुक्र है

PDP अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस समझौते को बेहद खुशी का दिन बताया. उन्होंने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया कि उसने ईरान को इजरायल के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत दी. हालांकि असल टकराव अमेरिका के साथ था और इस बात के लिए भी कि ईरान ने सिर्फ फौजी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगे थे कि उन्होंने ईरान के स्कूलों और अस्पतालों पर हमले किए थे.

श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुफ्ती ने कहा,’हम पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका को नजरअंदाज नहीं कर सकते. उन्होंने दुनिया को बचा लिया.’ उन्होंने हजारों लोगों की मौत की खबरों और दुनिया भर में फैली घबराहट के बीच तेहरान के संयम की तारीफ की.

फारूक अब्दुल्ला बोले- बातचीत ही इकलौता रास्ता

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने इस समझौते का स्वागत किया और जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया में शांति का एकमात्र रास्ता बातचीत ही है. श्रीनगर में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,’जंग से कुछ हल नहीं होता. सिर्फ बातचीत से होता है. मैं भगवान का शुक्रगुज़ार हूं कि उसने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर ला बिठाया.’

उन्होंने भारत से मध्यस्थ की भूमिका निभाने की अपील की, और इस बात का जिक्र किया कि इस संघर्ष का दुनिया के लिए बेहद जरूरी एनर्जी सप्लाई पर क्या असर पड़ रहा है.

उमर बोले- हासिल क्या हुआ जंग से?

इसके विपरीत, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘X’ पर इस सीजफायर की अहमियत पर सवाल उठाए. उन्होंने #UnjustWar के साथ पोस्ट करते हुए लिखा. ‘तो इस समझौते से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ फिर से खुल गया, जो जंग से पहले भी सभी के लिए खुला ही था. 40 दिनों के बाद अमेरिका को असल में क्या हासिल हुआ?’ उनकी इस पोस्ट ने रणनीतिक तौर पर मिली नाकामियों को उजागर किया, क्योंकि तेल की सप्लाई का यह अहम रास्ता (चोकपॉइंट) अब बिना किसी साफ अमेरिकी जीत के फिर से सभी के लिए खुल गया है.