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बजट सत्र 2026: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पेश करने जा रही है…

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छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पेश करने जा रही है। इस प्रस्तावित कानून में धोखाधड़ी या दबाव में किए गए मतांतरण पर 10 साल तक की कठोर सजा का प्रावधान है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है। यह सत्र 20 मार्च तक चलेगा और इसमें कुल 15 बैठकें होंगी। सत्र की शुरुआत राज्यपाल रामेन डेका के अभिभाषण से होगी। वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी 24 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण और वित्त मंत्री के बजट भाषण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और आकाशवाणी, रायपुर द्वारा किया जाएगा।

महत्वपूर्ण विधेयक होंगे पेश

अध्यक्ष ने यह भी बताया कि सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की सूचना मिली है। इनमें छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा प्रवर्तन विधेयक और छत्तीसगढ़ अग्नि एवं आपातकालीन सेवा विधेयक शामिल हैं।

जबरन मतांतरण विधेयक पर रहेगी नजर

तीन महत्वपूर्ण विधेयकों में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 प्रमुख है, जो जबरन मतांतरण के खिलाफ कठोर सजा का प्रावधान करेगा। सत्र के दौरान कुल 15 बैठकें निर्धारित हैं, जिसमें 24 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी साय सरकार का तीसरा बजट पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून में धोखाधड़ी, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से किए गए मतांतरण पर 10 वर्ष तक की कठोर सजा का प्रविधान संभावित है। धार्मिक स्वतंत्रता कानून को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित नौ राज्यों के अधिनियमों का अध्ययन किया है।

पुराने विधेयक की जगह लेगा कानून

यह नया विधेयक 1968 के पुराने कानून का स्थान लेगा। सत्र के पहले दिन राज्यपाल रमेन डेका का अभिभाषण होगा। 24 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे वित्त मंत्री ओपी चौधरी साय सरकार का तीसरा बजट पेश करेंगे। 25 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा होगी। 26-27 फरवरी को आय-व्यय पर सामान्य चर्चा की जाएगी। नौ से 17 मार्च तक विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा होगी।

कवासी लखमा भी रहेंगे उपस्थित

शराब घोटाला मामले में जमानत पर बाहर आए पूर्व मंत्री कवासी लखमा को सदन में उपस्थित रहने की अनुमति मिली है। उन पर कड़ी शर्तें लागू रहेंगी, जिसमें वे बजट पर तो बोल सकेंगे। लेकिन अपने ऊपर चल रहे न्यायालयीन मामले के गुण-दोष पर सदन के अंदर या बाहर कोई चर्चा नहीं करेंगे। उन्हें अपना सक्रिय मोबाइल नंबर सचिवालय में जमा करना होगा। वे अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा भी नहीं कर पाएंगे। सत्र के लिए विधानसभा को कुल 2,813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें 1,437 तारांकित प्रश्न शामिल हैं।