राजनांदगांव। राजधानी रायपुर में जनसंपर्क विभाग और छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य महोत्सव में संस्कारधानी राजनांदगांव का नाम पूरे प्रभाव के साथ गूंजता रहा। 23 से 25 जनवरी तक अटल नगर नया रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित इस साहित्योत्सव में राजनांदगांव जिले के साहित्यकारों और रचनाकारों ने रेखांकनीय भागीदारी निभाई और जिले की सशक्त साहित्यिक परंपरा का प्रतिनिधित्व किया।
महोत्सव के दौरान विशाल पंडालों में जहां देश-प्रदेश के ख्यातिनाम लेखकों, साहित्यकारों, कवियों और संस्कृतिकर्मियों के विमर्श चलते रहे, वहीं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, पुस्तक प्रदर्शनी, ओपन माइक और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। इस बहुरंगी माहौल में राजनांदगांव के रचनाकारों की सक्रिय उपस्थिति विशेष रूप से सराही गई।
मुक्तिबोध स्मारक की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
महोत्सव के प्रवेश द्वार पर जनसंपर्क विभाग द्वारा निर्मित त्रिवेणी परिसर स्थित मुक्तिबोध स्मारक एवं संग्रहालय पर आधारित विशाल झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। विशाल पुस्तक के आकार में बनी इस झांकी में एक ओर मुक्तिबोध संग्रहालय का चित्रण था, वहीं दूसरी ओर राजनांदगांव के साहित्यिक वैभव का विवरण अंकित था, जिसने हजारों दर्शकों को प्रभावित किया।
पहले दिन छत्तीसगढ़ के साहित्यिक योगदान पर हुआ विमर्श
महोत्सव के पहले दिन श्यामलाल चतुर्वेदी पंडाल में आयोजित सत्र में राजनांदगांव के प्रख्यात इतिहासकार एवं साहित्यकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने ‘हिंदी साहित्य के व्योम में छत्तीसगढ़ के नक्षत्र’ विषय पर वक्तव्य दिया। उन्होंने राजनांदगांव को हिंदी साहित्य की त्रिवेणी बताते हुए कहा कि यह डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, गजानन माधव मुक्तिबोध और डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र की प्रिय कर्मस्थली रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से राजनांदगांव के हिंदी साहित्य में योगदान को रेखांकित किया। सत्र में डॉ. सरला शर्मा, कवि माणिक विश्वकर्मा, आलोचक डॉ. मनिकेतन प्रधान और छंद विशेषज्ञ अरुण कुमार निगम भी शामिल रहे।
दूसरे दिन कवियों ने किया सरस काव्यपाठ
महोत्सव के दूसरे दिन सुरजीत नवदीप मंडप में आयोजित कवि सम्मेलन में राजनांदगांव जिले के आमंत्रित कवियों ने सरस काव्यपाठ कर श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरीं। सम्मेलन का संयोजन और मंच संचालन डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने किया। काव्यपाठ करने वालों में डॉ. शंकर मुनि राय, अब्दुस्सलाम कौसर, प्रभात तिवारी, शत्रुघ्न सिंह राजपूत, नीलम तिवारी, वीरेंद्र कुमार तिवारी ‘वीरू’, अनुराग सक्सेना, ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, महेंद्र कुमार बघेल ‘मधु’, राजकुमार चौधरी ‘रौना’, डॉ. इकबाल खान, डी.आर. सिन्हा और फकीर साहू शामिल रहे।
तीसरे दिन भी रही रचनाकारों की उपस्थिति
महोत्सव के तीसरे दिन भी राजनांदगांव के रचनाकारों की सक्रिय भागीदारी बनी रही। आत्माराम कोसा, अखिलेश मिश्रा, मैन सिंह मौलिक, प्रभास गुप्ता सहित कई साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
राजनांदगांव जिले की उल्लेखनीय सहभागिता पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साहित्यकारों और प्रतिभागियों का आभार जताया। रायपुर साहित्य महोत्सव में संस्कारधानी की यह सशक्त मौजूदगी जिले की साहित्यिक पहचान को और मजबूत करती नजर आई।



