राजनांदगांव। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले के पांचवे दिन “वर्तमान परिवेश में स्वदेशी स्वावलंबन” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वदेशी मेला परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार रखे।
गोष्ठी में जिला संयोजक श्री राजकुमार शर्मा ने उद्यमिता और स्वदेशी उद्योगों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरु की गई लाभकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी, जो नए उद्योगों की स्थापना में मददगार साबित हो रही हैं।
प्रोफेसर कृष्णकांत द्विवेदी ने आम जनता में स्वदेशी वस्तुओं की प्रभावशीलता पर चर्चा की और उनका तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि स्वदेशी उत्पादों का उपयोग न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से लाभकारी है, बल्कि यह समाज में आत्मनिर्भरता और समृद्धि का भी आधार बनता है।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री अशोक लोहिया ने आदिकाल से स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत और उसके प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी से स्वावलंबन तक का मार्ग हमें अपने देश में निर्मित वस्तुओं और संसाधनों का उपयोग करने की दिशा में प्रेरित करता है। लोहिया ने यह भी बताया कि महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर प्रधानमंत्री मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान तक, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता लगातार महसूस की जाती रही है।
गोष्ठी में प्रोफेसर कृष्ण कुमार द्विवेदी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वदेशी आंदोलन को एक महत्वपूर्ण हथियार बताया। उन्होंने विशेष रूप से 1905 के बंग-भंग आंदोलन का उदाहरण दिया, जब खादी और चरखे का इस्तेमाल आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में किया गया था।
वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने स्वदेशी भावना को महात्मा गांधी के योगदान के साथ जोड़ा और कहा कि गांधी जी ने स्वयं खादी पहनकर और चरखे से कपड़े बनवाकर देशवासियों में स्वदेशी का जज्बा जगाया।
गोष्ठी के दौरान डॉ. साधना तिवारी, सुषमा सिंह, छाया तिवारी जैसे वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। श्री अनिमेष रॉय ने कार्यक्रम का संचालन किया और गोष्ठी के समापन पर नशामुक्ति के संकल्प के साथ देशवासियों को स्वदेशी को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में बाबा जी, कांति मौर्य, अशोक जोशी, मनोज शुक्ला, सौरभ खंडेलवाल, नियामत हुड्डा, राकेश दुबे, सुनील बाजपेयी, फातिमा, सुहासनी क्षिरसागर, मंजू साहू, शोभा चोपड़ा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
गोष्ठी ने स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता के महत्व को आम जनता के बीच एक नया दृष्टिकोण दिया और यह सुनिश्चित किया कि स्वदेशी अपनाने की दिशा में सभी मिलकर काम करें।



