बीजापुर के केशकुतुल के पास सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाने नक्सलियों ने किसी नई तकनीक का उपयोग नहीं किया। वे जिस अंदाज में जवानों को फंसाते आए हैं उसी अंदाज में एंबुश लगाया है। अब तक बस्तर में हुई नक्सली घटनाओं में 70 फीसदी मामलों में नक्सलियों ने पुलिया के आसपास ही एंबुश बनाया है। उन्हें पता था कि जवान पैदल या गाड़ी में आएंगे तो पुलिये की आड़ लेकर हमला करना आसान होगा।
शुक्रवार को भी जवान बिना सुरक्षा के मोटरसाइकिल से ही सड़क पर निकल गए और नक्सलियों ने देवांगन पुलिया के निकट चलती बाइक पर ही जवानों को निशाना बना दिया। इससे पहले भी नक्सलियों ने तीन सौ से ज्यादा जवानों की जान इसी अंदाज में ली है। सुकमा में भी किस्टाराम के निकट नौ सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाया था। यहां भी एंबुश के लिए पुल का उपयोग किया था।
यूबीजीएल, प्रेशर बम और कमांड आईईडी भी लगाए : इलाके की सर्चिंग में पुलिस को तीन से अधिक कमाण्ड आईईडी और प्रेशर बम मिले हैं। नक्सलियों ने प्रेशर बम पत्तों और कागज के नीचे लगा रखा था वहीं कमाण्ड आईईडी के तार सड़क से लगे मिले। इसके अलावा नक्सलियों एलएमजी, इंसास, यूबीजीएल एवं दीगर ऑटोमेटिक हथियार से जवानों पर फायरिंग कर रहे थे।
जवानों के शव जगदलपुर मेडिकल कॉलेज लाए गए : जवानों के शवों को देर शाम मेकॉज लाया गया। यहां डाक्टरों ने जवानों के शवों का पीएम किया और शवों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए एंबाबिग भी किया गया। शवों के पीएम के बाद पुलिस ने इसे सीआरपीएफ के 80वीं बटालियन को सुपुर्द किया। इन शवों को रात में ही रायपुर के लिए रवाना कर दिया जाएगा। सुबह रायपुर में गार्ड ऑफ आॅनर के बाद जवानों के शवों को गृहग्राम भेजा जाएगा।
ड्राइवर की वजह से बची रिंकी की जान: इधर बीजापुर एसपी दिव्यांग पटेल ने भी माना कि पिकअप ड्राइवर तुरंत ही हास्पिटल नहीं आता तो घायल रिंकी की जान को खतरा हो जाता। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने बताया कि भैरमगढ़ में छात्रा के प्राथमिक इलाज के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जिला हाॅस्पिटल रेफर किया गया है।



