चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना गया है. ग्रहण काल के दौरान बहुत नियम और परंपराएं मानी जाती हैं. चंद्र ग्रहण के दौरान इसके सूतक काल का महत्व काफी ज्यादा माना जाता है.
इस साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन 03 मार्च को लगेगा. ये इस साल सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा. चांद को ग्रहण 03 घंटे 27 मिनट तक लगेगा.
ये चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. ये चंद्र ग्रहण भारत में नजर आएगा. ऐसे में इसका सूतक काल भी देश में मान्य होगा. बहुत से लोगों के मन में ये सवाल होता है कि सूतक काल किसे कहते हैं और ये चंद्र ग्रहण से कितनी देर पहले शुरू हो जाता है? आइए इन सभी बातों के बारे में विस्तार से जानते हैं. साथ ही जानते हैं सूतक काल के दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए?
क्या होता है सूतक काल?
ज्योतिष और धार्मिक दृष्टिकोण से सूतक की अवधि अशुभ और अशुद्ध अवधि मानी जाती है. समान्य शब्दों में कहा जाए तो सूतक काल वो अवधि मानी जाती है जो सूर्य और चंद्र ग्रहण से पहले शुरू हो जाती है. इस दौरान सावधानी और सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है.
चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब होता है शुरू?
सूतक काल कब लगेगा इसकी गणना का आधार ग्रहण की तिथि और ग्रहण का समय होता है. सूतक काल की गणना के लिए सबसे पहले सूर्य और चंद्र ग्रहण की तिथि और समय का पता किया जाता है. सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है और ग्रहण की समाप्ति तक रहता है. इसी तरह चंद्र ग्रहण का सूतक 3 प्रहर पहले यानी 09 घंटे पहले शुरू हो जाता है. ग्रहण के साथ ही सूतक स्वत: समाप्त हो जाता है.
सूतक काल में नहीं किए जाते ये काम
सूतक काल के समय पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इस दौरान नया या शुभ कार्य आरंभ नहीं किया जाता. इस दौरान भोजन बनाना और खाना वर्जित होता है. शादी, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ आयोजन सूतक काल और ग्रहण काल में नहीं किए जाते. सूतक शुरू होने के बाद गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता है. इस समय देवी-देवताओं की मूर्तियों और तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं किया जाता.
चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल
03 मार्च, मंगलवार को चंद्र ग्रहण दोपहर 03 बजकर 20 से शाम 06 बजकर 47 तक रहेगा. इसके सूतक की शुरुआत सुबह 09 बजकर 06 से होगी और शाम 06 बजकर 47 मिनट तक चलेगा.



