हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है. ये त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. होलिका दहन के अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है.
इस साल 03 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा है. इसी दिन होलिका दहन किया जाएगा. 04 मार्च को होली मनाई जाएगी. शास्त्रों में होलिका दहन की रात सिद्धि की रात मानी गई है.
कहते हैं कि इसी रात को भगवान विष्णु ने नरसिंंह अवतार में भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी. पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुर हिरण्यरश्यप ने अपनी बहन होलिका को कहा कि वो उसके पुत्र प्रहलाद को लेकर अग्नि बैठे, ताकि अग्नि में जलकर प्रहलाद की मृत्यु हो जाए, लेकिन नरसिंह भगवान ने प्रहलाद को आंच तक नहीं आने दी. यही कारण है कि होलिका दहन के दिन भगवान नरसिंह की कृपा पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं होलिका दहन के दिन किए जाने वाले उपायों के बारे में.
होलिका दहन के उपाय
होलिका दहन के दिन पूजा के समय अग्नि में मेवा और मिठाई अर्पित करें. ऐसा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है.
होलिका दहन के दिन पूजा के समय जटा वाला नारियल अग्नि में अर्पित करें. फिर सात बार होलिका की परिक्रमा करें. इससे करियर की बाधा दूर होती है.
होलिका की पवित्र अग्नि में पान का पत्ता, सुपारी और नारियल एक साथ अर्पित करें. इससे देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है. रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं.
एक सूखा नारियल, थोड़े काले तिल और सरसों के दाने अपने सिर से सात बार घुमाकर होलिका की अग्नि में डाल दें. इससे नकारात्मक उर्जा दूर होती है.
होलिका दहन के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान अवश्य करें. इससे ग्रह दोष दूर होते हैं.
होलिका की राख घर लाकर उसमें साबुत मिलाकर किसी सुरक्षित जगह पर रख दें. इससे घर का क्लेश खत्म होता है.



