लोकसभा में निलंबन पर प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन की तीखी निंदा की। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर मुद्दा करार दिया और सत्तारूढ़ एनडीए पर संसद में असहमति और बहस को दबाने का आरोप लगाया।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियंका ने कहा कि संसदीय सत्रों के दौरान इस तरह की घटनाएं अब सामान्य हो गई हैं, और यह आरोप लगाया कि विपक्ष, खासकर विपक्ष के नेता को जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है।
लोकतंत्र का मुद्दा
इसमें नया क्या है?
प्रियंका गांधी ने कहा, “आप हर सत्र में ऐसी घटनाएं देख सकते हैं। अब तो यह और भी बढ़ गया है। यह केवल विपक्ष के नेता को बोलने से रोकने का मामला नहीं है; यह लोकतंत्र और संसद के कार्यप्रणाली का एक मूलभूत मुद्दा है। संसद लोकतंत्र का मंदिर है। अगर कोई अपने विचार व्यक्त करता है, तो इसमें क्या समस्या है? उन्हें इस बात का डर है कि इसके परिणाम क्या होंगे।”
पूर्व सेना प्रमुख की किताब का जिक्र
कांग्रेस सांसद ने पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा कि इसे प्रकाशित नहीं होने दिया गया क्योंकि इसमें सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के तरीके पर आलोचनात्मक सामग्री थी। प्रियंका ने कहा, “उन्होंने किताब के प्रकाशन की अनुमति नहीं दी। मेरी जानकारी के अनुसार, किताब में ऐसी बातें हैं जो संकट के समय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और हमारे शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया को दर्शाती हैं।”
सरकार के आचरण पर सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि जब देश पर हमला हो रहा है और चीनी सैनिक हमारी सीमा पर आ रहे हैं, तो सरकार की प्रतिक्रिया क्या है, यह स्पष्ट होता है। प्रियंका ने हाल ही में जारी एपस्टीन फाइलों के मुद्दे को भी उठाया और सरकार के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े किए।



