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Republic Day 2026: क्या जंग में इस्तेमाल होने वाली तोपों से दी जाती है…

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Republic Day 2026: देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तिरंगा फहराने के साथ राष्ट्रगान बजाया गया और पारंपरिक 21 तोपों की सलामी दी गई. यह भारत के राष्ट्रपति को दिया जाने वाला सर्वोच्च औपचारिक सम्मान है.

इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या यह 21 तोप युद्ध में इस्तेमाल हुई तोप हैं और आखिर इनकी फायरिंग से कोई नुकसान क्यों नहीं होता.

21 तोपों की राष्ट्रपति सलामी क्या है

21 तोपों की सलामी एक औपचारिक सैन्य सम्मान है जो खास तौर से भारत के राष्ट्रपति के लिए आरक्षित है. राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं. गणतंत्र दिवस पर यह सलामी भारतीय सेना की एक फील्ड रेजीमेंट द्वारा ठीक राष्ट्रगान के दौरान दी जाती है.

किन तोपों का होता है इस्तेमाल

राष्ट्रपति सलामी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तोप को उनकी औपचारिक भूमिका में सक्रिय युद्ध में तैनात नहीं किया जाता है. पारंपरिक रूप से भारतीय सेना सलामी के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के समय की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल करती रही है. ये तोप अब फ्रंटलाइन युद्ध का हिस्सा नहीं हैं और खास तौर से औपचारिक कर्तव्यों के लिए संरक्षित हैं.

फायरिंग से कोई नुकसान क्यों नहीं होता

सलामी के हानिरहित होने की सबसे बड़ी वजह गोला बारूद है. ये तोप खाली कारतूस फायर करती हैं ना की असली गोले. खाली राउंड में बारूद की एक नियंत्रित मात्रा होती है जो सिर्फ तेज आवाज और दिखाई देने वाला धुआं पैदा करती हैं. अब क्योंकि बैरल से कुछ भी लॉन्च नहीं होता इस वजह से कोई भी विनाशकारी प्रभाव नहीं होता.

सटीक समय और सुरक्षा प्रोटोकॉल

21 राउंड सावधानी पूर्वक समयबद्ध क्रम में फायर किए जाते हैं. यह ठीक 52 सेकंड में पूरे होते हैं जो राष्ट्रगान की अवधि के बराबर है. यह सटीकता सैन्य अनुशासन को दर्शाती है और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है. इस्तेमाल किए जाने वाले काले पाउडर की मात्रा को सख्ती से नियंत्रित किया जाता है जो बिना किसी विस्फोटक बल के सिर्फ औपचारिक धमाका करती है.

इस बार क्या है खास

इस साल के गणतंत्र दिवस ने एक ऐतिहासिक बदलाव को अपनाया है. पहली बार पुरानी 25 पाउंडर तोपों के बजाय भारत में बनी 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई. यह सम्मान 172 फील्ड रेजीमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी ने दिया. इस स्वदेशी हथियार ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया था.