ओडिशा सरकार ने लोगों की सेहत को देखते हुए राज्य में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू/निकोटीन युक्त चबाने वाले सभी उत्पादों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है.
इस आदेश के बाद राज्यों में तंबाकू जनित इन उत्पादों का निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण, सब कुछ वैध हो गया है. सरकार के इस कदम की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं और इससे सेहत के लिए बढ़िया बता रहे हैं. लेकिन सरकार के लिए यह फैसला करना इतना आसान नहीं था. ऐसा करने के लिए सरकार को राजस्व के बहुत बड़े स्रोत से हाथ धोना पड़ा. वही राजस्व, जिससे प्रदेश सरकार जनता के लिए कल्याणकारी कार्य करती है.
तंबाकू उत्पादों पर बैन से ओडिशा को कितना घाटा
रिपोर्ट के मुताबिक, गुटखा-पान मसाला पर बैन लगाने से ओडिशा सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान होगा. इसका पता इसी तथ्य से लग सकता है कि राज्य को 2014-15 से 2024-25 यानी एक दशक में 6595 करोड़ रुपये का टैक्स इन उत्पादों की बिक्री से मिला था. जबकि 2025 में सरकार इन उत्पादों से लगभग 1047 करोड़ टैक्स इकट्ठा कर चुकी है. जो कि जो राज्य की कुल अपनी टैक्स आय का लगभग 1.75% हिस्सा बनता है.
राजस्व के लिए तलाश करने पड़ेंगे नए स्रोत
राज्य के वित्तीय ढांचे के लिहाज से यह नुकसान कम नहीं है. अब बैन के कारण यह राजस्व नहीं मिल पाएगा. इस राजस्व का इस्तेमाल सरकार लोगों की सेहत से जुड़े जनकल्याणकारी कार्यों में करते थे. लेकिन अब कर न मिलने की वजह से उसे वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ेगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो कैंसर रोकथाम कार्यक्रम और सार्वजनिक शिक्षा अभियानों के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ेगी.
दीर्घ अवधि में बन सकता है मुनाफे का सौदा
वहीं हेल्थ एक्सपर्टों का कहना है कि सरकार को शॉर्ट टर्म में भले ही राजस्व का भारी नुकसान होने जा रहा है. लेकिन दीर्घ अवधि में यही फैसला उसके लिए बेहद फायदेमंद सिद्ध हो सकता है. उनका कहना है कि तंबाकू जनित उत्पादों पर रोक लगने से उससे जुड़ी बीमारियों में कमी आएगी.
ये बीमारियां ऐसी हैं, जिनका इलाज बहुत महंगा होता है और हर इंसान उसका खर्च वहन नहीं कर सकता. ऐसे में सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए सरकार को अस्पतालों में उनके इलाज का इंतजाम करना पड़ता है. जिससे सरकार का खर्चा बढ़ता है. दीर्घ अवधि में बीमारियां घटने पर सरकार के ऊपर से इलाज का बोझ भी कम हो सकता है. जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव कम हो सकता है.
नुकसान के बावजूद सरकार-जनता खुश
कुल मिलाकर ओडिशा की मोहन चरण मांझी सरकार का यह ऐसा बड़ा फैसला है. जिससे नुकसान होने के बावजूद सरकार और जनता दोनों खुश हैं. दोनों को पता है कि अगर इस फैसले पर ईमानदारी से अमल हो गया तो यह लोगों की तकदीर सुधार सकता है.
क्या वाकई लागू हो पाएगा ये बैन?
ओडिशा की मोहन चरण मांझी सरकार ने भले ही भलमनसाहत की भावना से ये फैसला ले लिया हो. लेकिन सवाल है कि क्या ये डिसीजन वाकई टिक पाएगा. इसकी वजह ये है कि ओडिशा की सीमा झारखंड, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश से मिलती है. जहां पर तंबाकू उत्पादों पर कोई बैन नहीं है. इन राज्यों से रोजाना हजारों लोग ओडिशा आते-जाते हैं. ऐसे में क्या दूसरे राज्यों से इसकी तस्करी नहीं होगी. यह एक ऐसा कड़वा सवाल है, जिससे प्रदेश सरकार को निश्चित रूप से जूझना पड़ेगा.



