भारतीय सेना के चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले को लेकर एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि वह उस क्षण को नहीं भूल सकते हैं जब उन्हें पहलगाम हमले की सूचना मिली थी.
उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद जब भी वह स्टेज पर खड़े होते हैं उन्हें उसी दिन की याद आती है. बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले में लश्कर से जुड़े आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद भारत ने 7 मई 2025 को PoK में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था.
‘मुझे हमेशा उन दिनों की याद आ जाती है…’
जनरल द्विवेदी ने गुरुवार 22 जनवरी 2025 को एक पुस्तक विमोचन समारोह में बताया कि उन्हें पहलगाम हमले के बारे में जानकारी कैसे मिली. उन्होंने कहा,’ 22 अप्रैल के बाद जब भी मैं मंच पर खड़ा होता हूं, मैं हमेशा थोड़ा सतर्क और आशंकित रहता हूं. इसका कारण 22 अप्रैल 2025 का दिन है जब मैं रिटायरिंग ऑफिसर सेमिनार दे रहा था और अपने भाषण का तीन-चौथाई हिस्सा पूरा कर चुका था कि तभी अचानक तत्कालीन DGMO राजीव घई अंदर आए और बोले सर, थोड़ा सा तो, जब DGMO ‘छोटा सा’ कहते हैं, तो आप समझ जाते हैं. वे आपके भाषण के बीच में आए और आप जो बोलने वाले थे, उससे पहले ही उन्होंने आपको टोक दिया, इसलिए जरूर कोई और बात होगी.’ उन्होंने कहा इसलिए जब भी मैं मंच पर खड़ा होता हूं. मुझे हमेशा उन दिनों की याद आ जाती है.’
दुश्मन पर नजर रख रही भारतीय सेना
बता दें कि सेना प्रमुख ने बीते हफ्ते इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना दुश्मन की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही है, हालांकि ओवरऑल सिक्योरिटी अभी कंट्रोल में है. बुधवार 21 जनवरी 2026 को जयपुर में एक समारोह में जनरल द्विवेदी ने कहा था कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में 9 आतंकवादी कैंप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर संयुक्त रूप से हमला कर मात्र 22 मिनट में सटीकता के साथ ऑपरेशन को पूरा किया.
पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर किया
सोना प्रमुख ने कहा,’ सिर्फ 88 घंटों के अंदर हमारी सटीकता, स्किल और ऑपरेशनल सुपीरिऑरिटी ने पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर कर दिया.’ उन्होंने इसे नेशनल इंटीग्रिटी और हितों की रक्षा करने की भारत की क्षमता का प्रदर्शन बताया. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध अकेले किसी एक बल के दम पर नहीं जीते जा सकते, बल्कि इसके लिए समन्वित राष्ट्रीय प्रयास की आवश्यकता है.



