डोंगरगांव। स्थानीय साकेत धाम में आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन में वक्ताओं ने हिंदू समाज की एकजुटता और राष्ट्र रक्षा का पुरजोर आह्वान किया। सम्मेलन में गायत्री मंदिर से निकली ऐतिहासिक कलश यात्रा और साकेत धाम में सर्वसमाज की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में मातृशक्ति और सर्वसमाज के बंधुओं ने भाग लिया, जिन्होंने एकजुट होकर धर्म, राष्ट्र और समाज की सुरक्षा की शपथ ली।
सम्मेलन में मौजूद थे प्रमुख समाजिक और धार्मिक नेता:
इस अवसर पर मंच पर सर्व समाज के प्रमुखों ने मंच साझा किया, जिनमें दिनेश गांधी, लक्ष्मी नारायण गुप्ता, एन के लहरें, डिकेश साहू, अजय वैष्णव, दिग्विजय शांडिल्य, रेवादास मानिकपुरी, प्रेम गोस्वामी, भजन साहू, श्रीमती निर्मल सिन्हा, रंजीत पटौदी, पद्मिनी ठाकुर, सीता गुप्ता, चंद्रकला गुप्ता, हिना मंगल जैन, ममता यूके, ऋतु सोनकर, पार्वती साहू, बरखा गुप्ता, माहेश्वरी गजीर, और रानी तिवारी सहित अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति शामिल थे।
मुख्य वक्ताओं के संबोधन:
राजेश भार्गव (प्रांत संगठन मंत्री, हिंदू जागरण मंच) ने अपने संबोधन में कहा, “हमें अपनी पहचान और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। हिंदू समाज को जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की भावनाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र रक्षा के लिए एक सूत्र में पिरोना होगा। जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र सुरक्षित रहता है। हमें अपनी परंपराओं के विरुद्ध हो रहे षड्यंत्रों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।”
महंत गिरवर साहेब (प्राचीन कबीर मठ) ने आध्यात्मिक समरसता पर जोर देते हुए कहा, “धर्म का वास्तविक अर्थ सेवा और मानवता है। कबीर साहेब ने सदैव समाज को जोड़ने का कार्य किया। आज समय की मांग है कि हम संत समाज के मार्गदर्शन में अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटें और समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाएं।”
ऋतु शर्मा (जिला कार्यवाहिका, राष्ट्र सेविका समिति) ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा, “हिंदू समाज की मजबूती में महिलाओं का योगदान सदैव सर्वोपरि रहा है। जीजाबाई और रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं का आदर्श हमारे सामने है। एक जागरूक और संस्कारवान माँ ही एक समर्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। परिवारों में धर्म और संस्कृति के संस्कार डालना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
वेदांती पुरुषोत्तम राजपूत (मानस मर्मज्ञ) ने वेद की ऋचाओं और रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आज के सम्मेलन का मूल मंत्र है। मर्यादा पुरुषोत्तम का जीवन हमें अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”
सम्मेलन का समापन:
सम्मेलन में डोंगरगांव और खुज्जी मंडल के कोने-कोने से आई मातृशक्ति और सामाजिक बंधुओं का हुजूम देखना अद्भुत था। मंच पर सभी समाजों के प्रमुखों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पूरा हिंदू समाज एकजुट है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक भारत माता की आरती के साथ हुआ, जिसके बाद हजारों लोगों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
कार्यक्रम का संचालन और आभार:
कार्यक्रम का संचालन हिंदू सम्मेलन के संयोजक रामकुमार गुप्ता ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन सह संयोजक श्रीमती अंजू त्रिपाठी ने किया। इस आयोजन में संतोष यादव, मनोज हेमनानी, राजा जैन, योगेश पटेल, सतीश पांडे, हिना मंगल जैन, लोकेश यदु, मनबोधि पटेल और हेमंत यदु की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
डोंगरगांव में भव्य हिंदू सम्मेलन सम्पन्न, जातिवाद को छोड़ धर्म और राष्ट्र के लिए एकजुटता का दिया संदेश
डोंगरगांव। स्थानीय साकेत धाम में आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन में वक्ताओं ने हिंदू समाज की एकजुटता और राष्ट्र रक्षा का पुरजोर आह्वान किया। सम्मेलन में गायत्री मंदिर से निकली ऐतिहासिक कलश यात्रा और साकेत धाम में सर्वसमाज की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में मातृशक्ति और सर्वसमाज के बंधुओं ने भाग लिया, जिन्होंने एकजुट होकर धर्म, राष्ट्र और समाज की सुरक्षा की शपथ ली।
सम्मेलन में मौजूद थे प्रमुख समाजिक और धार्मिक नेता:
इस अवसर पर मंच पर सर्व समाज के प्रमुखों ने मंच साझा किया, जिनमें दिनेश गांधी, लक्ष्मी नारायण गुप्ता, एन के लहरें, डिकेश साहू, अजय वैष्णव, दिग्विजय शांडिल्य, रेवादास मानिकपुरी, प्रेम गोस्वामी, भजन साहू, श्रीमती निर्मल सिन्हा, रंजीत पटौदी, पद्मिनी ठाकुर, सीता गुप्ता, चंद्रकला गुप्ता, हिना मंगल जैन, ममता यूके, ऋतु सोनकर, पार्वती साहू, बरखा गुप्ता, माहेश्वरी गजीर, और रानी तिवारी सहित अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति शामिल थे।
मुख्य वक्ताओं के संबोधन:
राजेश भार्गव (प्रांत संगठन मंत्री, हिंदू जागरण मंच) ने अपने संबोधन में कहा, “हमें अपनी पहचान और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। हिंदू समाज को जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की भावनाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र रक्षा के लिए एक सूत्र में पिरोना होगा। जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र सुरक्षित रहता है। हमें अपनी परंपराओं के विरुद्ध हो रहे षड्यंत्रों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।”
महंत गिरवर साहेब (प्राचीन कबीर मठ) ने आध्यात्मिक समरसता पर जोर देते हुए कहा, “धर्म का वास्तविक अर्थ सेवा और मानवता है। कबीर साहेब ने सदैव समाज को जोड़ने का कार्य किया। आज समय की मांग है कि हम संत समाज के मार्गदर्शन में अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटें और समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाएं।”
ऋतु शर्मा (जिला कार्यवाहिका, राष्ट्र सेविका समिति) ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा, “हिंदू समाज की मजबूती में महिलाओं का योगदान सदैव सर्वोपरि रहा है। जीजाबाई और रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं का आदर्श हमारे सामने है। एक जागरूक और संस्कारवान माँ ही एक समर्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। परिवारों में धर्म और संस्कृति के संस्कार डालना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
वेदांती पुरुषोत्तम राजपूत (मानस मर्मज्ञ) ने वेद की ऋचाओं और रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आज के सम्मेलन का मूल मंत्र है। मर्यादा पुरुषोत्तम का जीवन हमें अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”
सम्मेलन का समापन:
सम्मेलन में डोंगरगांव और खुज्जी मंडल के कोने-कोने से आई मातृशक्ति और सामाजिक बंधुओं का हुजूम देखना अद्भुत था। मंच पर सभी समाजों के प्रमुखों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पूरा हिंदू समाज एकजुट है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक भारत माता की आरती के साथ हुआ, जिसके बाद हजारों लोगों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
कार्यक्रम का संचालन और आभार:
कार्यक्रम का संचालन हिंदू सम्मेलन के संयोजक रामकुमार गुप्ता ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन सह संयोजक श्रीमती अंजू त्रिपाठी ने किया। इस आयोजन में संतोष यादव, मनोज हेमनानी, राजा जैन, योगेश पटेल, सतीश पांडे, हिना मंगल जैन, लोकेश यदु, मनबोधि पटेल और हेमंत यदु की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



