मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद, सोमवार को दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई। आज भारतीय मार्केट बंद हैं, जबकि दूसरे एशियाई मार्केट खुले हैं। ज़्यादातर एशियाई मार्केट में बड़ी गिरावट देखी गई है, जिसमें साउथ कोरिया का मार्केट भी शामिल है।
मंगलवार को खुलते ही साउथ कोरिया का मार्केट 7% से ज़्यादा गिर गया, जिससे इन्वेस्टर्स की लगभग $270 बिलियन (लगभग 390 ट्रिलियन वॉन) की मार्केट वैल्यू खत्म हो गई। यह गिरावट अगस्त 2024 के येन कैरी ट्रेड संकट के बाद सबसे बड़ी बताई जा रही है।
इतनी अचानक गिरावट क्यों?
साउथ कोरिया का लीडिंग इंडेक्स, KOSPI इंडेक्स, मंगलवार को खुलते ही 7.23% गिर गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बड़ी गिरावट इसलिए हुई क्योंकि सोमवार को साउथ कोरिया का मार्केट बंद था, जिसका सीधा असर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर पड़ा, जिससे मंगलवार को इतनी बड़ी गिरावट आई। इस बड़ी गिरावट का नतीजा टेक सेक्टर पर काफी दबाव के रूप में सामने आया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर 10% तक गिर गए। दूसरी चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयर में भी बड़ी गिरावट देखी गई।
युद्ध और एनर्जी सप्लाई की समस्याएँ
मिडिल ईस्ट में हमलों से जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ गया है और ग्लोबल महंगाई का खतरा मंडरा रहा है, जो ग्लोबल इकॉनमी के लिए अच्छा संकेत नहीं है। इसके अलावा, एनर्जी सप्लाई का संकट भी मंडरा रहा है। एनर्जी के बिना, दुनिया भर की इंडस्ट्रीज़ ठप हो सकती हैं। एनर्जी की बढ़ती लागत का सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग और टेक कंपनियों के मुनाफ़े पर पड़ सकता है। इससे ग्लोबल मार्केट में काफ़ी गिरावट आई है। अगर यह युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है, तो कोरियन मार्केट में काफ़ी गिरावट आएगी, क्योंकि इस साल कोस्पी में ज़बरदस्त तेज़ी आई है।
कल भारत में क्या होगा?
सोमवार को भारत का निफ्टी और सेंसेक्स तेज़ी से गिरा, लेकिन इस मार्केट में अभी भी दबाव दिख रहा है। GIFT निफ्टी में 200 पॉइंट्स की गिरावट दिख रही है। बुधवार को भी शेयर मार्केट पर दबाव रह सकता है। अगर तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी जारी रहती है, तो भारत जैसे इंपोर्ट पर निर्भर देश पर दबाव बढ़ सकता है। इससे भारतीय शेयर मार्केट में गिरावट आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन्वेस्टर्स को अभी इंतज़ार करने की ज़रूरत है।



