पथरिया बैराज को 56.06 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति’
राजिम में सस्पेंशन ब्रिज निर्माण के लिए मिली 40.60 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति’
रविशंकर सागर परियोजना मरम्मत के लिए 2.92 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति’
पथरिया बैराज को 56.06 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति’
पथरिया बैराज से 1925 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगी सिंचाई सुविधा’
राज्य शासन द्वारा मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया अंतर्गत पथरिया बैराज निर्माण कार्य हेतु 56.06 करोड़ (छप्पन करोड़ छः लाख रुपये) की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के पूर्ण होने पर लगभग 1640 हेक्टेयर खरीफ एवं 285 हेक्टेयर रबी फसल मिलाकर कुल 1925 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी।
राज्य शासन ने निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत कार्य लागत एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। कार्य प्रारंभ करने से पूर्व सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करना तथा ड्रॉइंग एवं डिज़ाइन का अनुमोदन सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। निविदा प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक रखा जाएगा तथा कम से कम 75 प्रतिशत बाधारहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा आमंत्रित की जाएगी। निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं तथा किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
राज्य शासन ने कहा है कि कार्य को अनुबंधानुसार निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना अनिवार्य होगा तथा अनावश्यक समय-वृद्धि की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, यदि योजना में भू-अर्जन प्रस्तावित है तो स्वीकृत राशि की सीमा के अंतर्गत ही व्यय किया जाएगा तथा बिना पूर्व स्वीकृति किसी अन्य मद से राशि का उपयोग नहीं किया जाएगा। यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है तो शासकीय भूमि पर ही निर्माण कार्य सुनिश्चित किया जाएगा। परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय कृषि, उत्पादन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राजिम में सस्पेंशन ब्रिज निर्माण के लिए मिली 40.60 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति’
धार्मिक स्थलों के बीच सुगम आवागमन एवं पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा’
राज्य शासन द्वारा गरियाबंद जिले के विकासखण्ड राजिम अंतर्गत महानदी पर राजीव लोचन मंदिर से कुलेश्वर महादेव मंदिर तक तथा कुलेश्वर महादेव मंदिर से लोमेश ऋषि आश्रम तक सस्पेंशन ब्रिज निर्माण कार्य के लिए 40.60 करोड़ (चालीस करोड़ साठ लाख रुपये) की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा तथा धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
राज्य शासन ने निर्देश दिए हैं कि कार्य स्वीकृत राशि एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। कार्य प्रारंभ करने से पूर्व सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करना तथा ड्रॉइंग एवं डिज़ाइन का अनुमोदन सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। निविदा प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक रखा जाएगा तथा कम से कम 75 प्रतिशत बाधारहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा आमंत्रित की जाएगी।
राज्य शासन ने निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं तथा किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। इसके अतिरिक्त यदि कार्य में भू-अर्जन प्रस्तावित है तो स्वीकृत राशि की सीमा के अंतर्गत ही व्यय किया जाएगा तथा बिना पूर्व स्वीकृति किसी अन्य मद की बचत राशि से भू-अर्जन की कार्यवाही नहीं की जाएगी। यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है तो शासकीय भूमि पर ही निर्माण कार्य सुनिश्चित किया जाएगा। इस कार्य के पूर्ण होने पर क्षेत्र में बेहतर संपर्क सुविधा विकसित होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, धार्मिक पर्यटन एवं आमनागरिकों को व्यापक लाभ मिलेगा।
रविशंकर सागर परियोजना मरम्मत के लिए 2.92 करोड़ की’
पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति’
बांध होगी सुरक्षित और मजबूत’
राज्य शासन द्वारा धमतरी जिले के विकासखण्ड धमतरी अंतर्गत बाँध सुरक्षा ड्रिप फेस-।। के तहत रविशंकर सागर परियोजना (गंगरेल) के बकेट एवं एण्डसील मरम्मत तथा डिस्टर्व पिचिंग के री-सेटिंग कार्य हेतु 2.9286 करोड़ (दो करोड़ ब्यानवे लाख छियासी हजार रुपये) की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस कार्य के पूर्ण होने से बाँध की सुरक्षा एवं संरचनात्मक की मजबूती में वृद्धि होगी तथा जल प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।
राज्य शासन ने निर्देश दिए हैं कि कार्य स्वीकृत राशि एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। कार्य प्रारंभ करने से पूर्व सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करना तथा ड्रॉइंग एवं डिज़ाइन का अनुमोदन सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। निविदा प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक रखा जाएगा तथा कम से कम 75 प्रतिशत बाधारहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा आमंत्रित की जाएगी। निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं तथा किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
कार्य को अनुबंधानुसार निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना अनिवार्य होगा तथा अनावश्यक समय-वृद्धि की अनुमति नहीं दी जाएगी। परियोजना के पूर्ण होने पर बाँध की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे क्षेत्र में जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन को मजबूती मिलेगी तथा सिंचाई व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।



