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शिया मुस्लिम और सुन्नी मुस्लिम में क्या अंतर, दोनों एक-दूसरे को क्यों मानते हैं दुश्मन?

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मिडिल ईस्ट में इस समय युद्ध के हालात बने हुए हैं. अमेरिका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से कई अरब देशों पर मिसाइल दागी गई है, जिससे पूरा मिडिल ईस्ट का क्षेत्र अस्थिर हो गया है.

वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद अलग-अलग देश में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जहां शिया समुदाय अयातुल्लाह की मौत के बाद सड़कों पर उतर आया है, वहीं कई सुन्नी बहुल देशों की सरकार ने इसे ईरान का अंदरूनी मामला बताया है.

ऐसे में एक बार फिर शिया और सुन्नी के बीच का पुराना विवाद चर्चा में है. इसके बाद सवाल यह भी उठने लगे हैं कि दोनों ही समुदाय इस्लाम को मानने वाले हैं, लेकिन इनके बीच इतनी गहरी दुश्मनी क्यों है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि शिया मुस्लिम और सुन्नी मुस्लिम में क्या अंतर है और दोनों एक दूसरे को दुश्मन क्यों मानते हैं.

शिया और सुन्नी में कैसे हुआ बंटवारा?

जानकारी के मुताबिक, करीब 1400 साल पहले 632 ईस्वी में पैगंबर हजरत मोहम्मद के इंतकाल के बाद नेतृत्व को लेकर मतभेद शुरू हुआ. एक समूह का मन था कि उनके करीबी साथी अबू बकर को नेतृत्व संभालना चाहिए. वहीं दूसरा समूह मानता था कि उनके दामाद हजरत अली ही असली उत्तराधिकारी हैं. यहीं से मुसलमान दो हिस्सों में बट गए. अबू बकर को मानने वाले सुन्नी कहलाए और हजरत अली को मानने वाले शिया. यह शुरुआत में राजनीतिक विवाद था, लेकिन समय के साथ यह धार्मिक पहचान का हिस्सा भी बन गया.

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सुन्नी मुसलमान कौन होते हैं और कहां सबसे ज्यादा?

सुन्नी मुसलमान दुनिया की कुल आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा माना जाता है. अनुमान के अनुसार, दुनिया में करीब 85 प्रतिशत मुसलमान सुन्नी है. वहीं पैगंबर मोहम्मद के इंतकाल के बाद जो लोग अबू बकर को पहला खलीफा मानते थे. वह आगे चलकर सुन्नी कहलाए. आज सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देशों में सुन्नी बहुसंख्यक है. वहीं सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों की राजनीतिक और सैन्य ताकत भी ज्यादा मानी जाती है, इसलिए वैश्विक स्तर पर सुन्नी देश का प्रभाव बड़ा है.

कौन होते हैं शिया मुसलमान?

शिया मुसलमान दुनिया की कुल मुस्लिम आबादी का करीब 15 प्रतिशत माने जाते हैं. यह लोग मानते हैं कि पैगंबर मोहम्मद के बाद नेतृत्व उनके दामाद हजरत अली को मिलना चाहिए था. शिया समुदाय में धार्मिक नेताओं खासकर अयातुल्लाह को विशेष महत्व दिया जाता है. वहीं ईरान दुनिया का सबसे बड़ा शिया बहुल देश है. जहां करीब 90 प्रतिशत शिया है. इसके अलावा इराक में भी शिया बहुसंख्यक है. इनके अलावा लेबनान, बहरीन और अजरबैजान में भी शिया आबादी बड़ी संख्या में रहती है.