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बिजली सिस्टम सुधारने 9 हजार करोड़ का फंड:केंद्र की शर्त- विभाग बिल भर दें, तभी मिलेगा, सरकारी विभागों ने बिल नहीं भरा तो केंद्र रोकेगा फंड

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छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) के 1223 करोड़ रुपए के बिजली बिल प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों तथा 47 नगरीय निकायों में अटक गए हैं। इनमें पंचायतों और निकायों से ही 1,000 करोड़ रुपए से अधिक रकम लेनी है। यह रकम पिछले तीन साल की है और पेमेंट नहीं हो रहा है। अब यह मामला गंभीर हो गया है, क्योंकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक यह पूरी रकम नहीं वसूली जाती, दिल्ली से यहां के करीब 53 लाख कनेक्शनधारियों को सुविधा देने वाली योजनाओं के लिए निर्धारित 9000 करोड़ रुपए नहीं दिए जाएंगे।

यह फंड नहीं मिला तो प्रदेश में लो वोल्टेज तथा अघोषित कटौती, 25 लाख घरों में प्रीपेड मीटर, बिजली तारों के जाल को अंडरग्राउंड करने जैसे काम रोकने पड़ जाएंगे। पड़ताल में सामने आया कि केंद्र की शर्त पर राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 का बकाया बिल रुपए 700 करोड़ का भुगतान कर दिया है।

मगर, अभी भी 1223 करोड़ बकाया है। यह राशि केंद्र सरकार 3 किस्त में अदा करेगी। देरी होने पर केंद्र ने जुर्माने की शर्त भी जोड़ रखी है। उधर, इसी मुद्दे को लेकर मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने नवंबर में विभाग प्रमुखों की बैठक लेकर उन्हें जल्द शेष बकाया बिल अदा करने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं (गैर-शासकीय) से 1,736 करोड़ की भी वसूली होनी है। इनमें सर्वाधिक कार्रवाई 50 हजार रुपए से कम बिजली बिल भुगतान न करने वाले उपभोक्ताओं पर होती है।

इसके लिए 15 दिन की ही मोहलत दी जाती है। राज्य में कार्रवाई जारी है।आम उपभोक्ताओं को सिर्फ 15 दिन सीएसपीडीसीएल के नियम के अनुसार बिजली बिल जारी होने के 8 दिनों के अंदर उपभोक्ता को इसका भुगतान करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर 15 दिन का नोटिस जारी कर कनेक्शन काट दिया जाता है। मगर, 1223 करोड़ रुपए बकाया होने के बावजूद किसी भी सरकारी विभाग का कनेक्शन नहीं काटा गया। निकायों से बिल वसूली के लिए सिर्फ ऊर्जा सचिव से पत्राचार हुआ, विभागों और निकायों से हुआ ही नहीं। यह औपचारिक पत्राचार हर महीने चल रहा है।

पिछले साल हुआ था विवाद
पिछले साल बिजली कंपनी ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और अंबिकापुर समेत कई नगरीय निकायों में स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन काट दिए थे। सड़कें अंधेरे में डूब गई थीं। कंपनी ने चेतावनी दी थी कि बिल भुगतान के बाद सप्लाई बहाल होगी। विवाद बढ़ाने पर शासन के हस्ताक्षेप पर कनेक्शन जोड़े गए। यही वजह है कि इस साल ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कंपनी अधिकारियों का कहना है कि निकाय और सरकारी कार्यालय सीधे जनता से जुड़े हैं। कनेक्शन काटने से काम-काज पर असर पड़ सकता है।

53 लाख बिजली उपभोक्ता हैं छत्तीसगढ़ में

1223 करोड़ निकायों सरकारी विभागों का बकाया

1736 करोड़ बचे गैर सरकारी, उपभोक्ताओं का

3000 करोड़ की लेनदारी बिजली कंपनी की

रायपुर में 50 वीआईपी पर 25 लाख बकाया
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि राजधानी रायपुर में रहने वाले 50 वीआईपी पर 25 लाख से अधिक का बिल बकाया है। इनमें से अधिकांश के बंगले शंकर नगर क्षेत्र में आते हैं। इन्हें नोटिस जारी हुए हैं, मगर भुगतान नहीं हुआ है। एक विभागीय जूनियर इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नोटिस प्रक्रिया का हिस्सा है, कनेक्शन काटना संभव नहीं। किसी को अपना तबादला नहीं करवाना। वहीं रायपुर में 172 ऐसे उपभोक्ता हैं जिन पर प्रति उपभोक्ता 50 हजार से अधिक, कुल 1.71 करोड़ रुपए बकाया है। इनमें से 97 उपभोक्ताओं ने बिल चुका दिया है।

केंद्र की योजना का फंड रुकेगा
केंद्र देशभर में सवम्पेड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) लागू कर रही है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं से जुड़े बिजली के हर सिस्टम में सुधार लाना है। इसी में स्मार्ट मीटर, अंडरग्राउंड केबलिंग, लो-वोल्टेज जैसी समस्याएं खत्म करना आदि शामिल हैं। इसी योजना में केंद्र से 9000 करोड़ फंड मिलना है।

तेलंगाना से लेने हैं 3600 करोड़
राज्य सरकार तेलंगाना राज्य को बिजली बेचती है। इस वक्त तक तेलंगाना 3600 करोड़ रुपए की बिजली छत्तीसगढ़ से खरीद चुका है लेकिन अब तक पेमेंट नहीं हुआ है। कई बार पत्र-व्यवहार के बाद अब जाकर तेलंगाना सरकार ने 2100 करोड़ देने पर सहमति दी है। वह भी हर महीने 55 करोड़ रुपए की किस्त के रूप में।

शासन सक्रिय, सीएस ने ली बैठक- केंद्र की फंड नहीं देने की शर्त के बाद सीएस अमिताभ जैन ने विभाग प्रमुखों की बैठक ली और बिल के भुगतान के निर्देश दिए।

10 करोड़ से ज्यादा बाकी
10 करोड़ से ज्यादा बाकी

बिजली कंपनी के नियम सभी के लिए एक हैं। निकायों-सरकारी विभागों पर बिल बकाया है। इन्हें नोटिस जारी कर रहे हैं। यह साफ है कि अगर विभाग पेमेंट नहीं करेंगे तो केंद्र से फंड नहीं आएगा और कई काम रुकेंगे।