आदिशक्ति महामाया देवी की नगरी रतनपुर के भैरव मंदिर नौ दिवसीय भैरव जन्म महोत्सव का आयोजन हुआ। इस दौरान पूरे नौ दिनों तक रूद्र महायज्ञ किया गया, जिसमें तीन लाख आहुतियां दी गई और प्रदेश भर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए कामना की।
15 नवंबर से शुरू हुए इस रुद्र महायज्ञ व अनुष्ठान में प्रदेश भर से भक्त और श्रद्धालु अपनी कामनाओं की सिद्धि के लिए आहुतियां देने पहुंचे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं.जागेश्वर अवस्थी ने बताया कि रुद्र महायज्ञ में अब तक 2 लाख 40 हजार आहुतियां दी जाती हैं। दशांश हवन करके दो लाख चौंसठ हजार रुद्र महायज्ञ में आहुति अग्नि देव को समर्पित किए जाते हैं। श्री सिद्ध तंत्र पीठ भैरव मंदिर में भैरव जयंती पर रुद्र महायज्ञ किया जा रहा है, जिसमें लगभग तीन लाख आहुति दी जा चुकी है।

वातावरण में आती है सकारात्मकता
उन्होंने बताया कि यज्ञ-आहुति जितनी ज्यादा दी जाती है इससे वातावरण में उतनी ही सकारात्मकता फैलती है। इससे वातावरण शुद्ध और मन में शांति और आध्यात्मिक संचार होता है। यज्ञ में दी जाने वाली आहुति भगवान का भोजन होता है। मान्यता है यज्ञ में तिल, जौं, मधुरस, चावल, शुद्ध घी और हवन औषधि अर्पित करने से भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। लोगों की अलग-अलग कामनाओं के लिए अलग-अलग मंत्रों से आहुति दी गई। क्षेत्ररक्षण के लिए बाली के बाद चौमुखी दीप को कीर्तन के साथ विदाई दी गई। इस अनुष्ठान में आचार्य पंडित गिरधारी लाल पांडेय, दिलीप दुबे, राजेंद्र दुबे, महेश्वर पांडेय, कान्हा तिवारी, दीपक अवस्थी, अवनीश उपाचार्य, दीपक पांडेय, शुभम पांडेय, यशवंत सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

भंडारा प्रसाद के साथ हुआ समापन
15 नवंबर से शुरू इस अनुष्ठान का समापन बुधवार को हुआ। 15 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराया। मुख्य जजमान लोक मंगल व खुशहाली के लिए विशेष आहुति दी। सुबह 8 बजे से दैनिक पूजा शुरू हुई। इसमें प्रति दिन की तरह स्फटिक से बने रत्नेश्वर शिवलिंग का शोणषोप्चार, रूद्र यज्ञ, यज्ञ मंडप में रूद्राभिषेक व पूजा की गई। इसके बाद आवाहित देवी-देवताओं की पूजा की गई। सुबह अभिजीत मुहूर्त में 11.20 बजे यज्ञ की पूर्णाहुति दी गई। इसके बाद पूरे दिन भंडारा प्रसाद का दौर चलता रहा।