दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन में पुलिस की कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर हैं. विपक्ष लगातार इन दोनों मामलों पर सरकार से संसद में जवाब की मांग कर रही है.
जिस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पूरे डिटेल में जो भी छात्र आंदोलन हो रहे हैं, उस पर चर्चा के लिए तैयार है और आप गृह मंत्री अमित शाह का जवाब सुनेंगे, ये आपको विश्वास दिलाना पड़ेगा. केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर अब कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है.
किरेन रिजिजू के बयान पर क्या बोले जयराम रमेश?
कांग्रेस के संचार विभाग के इनचार्ज, महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने सोमवार (10 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, ’20 जुलाई, 2026 को संसद के मानसून सत्र के शुरू होने के बाद से ही विपक्षी पार्टियां लगातार और पूरी दृढ़ता के साथ अपनी मांगों को उठा रही हैं. जिसमें पहला- दिल्ली पुलिस की कार्रवाइयों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बयान दें, जो उनके अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस की तरफ से प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ की गई बर्बरता से जुड़ी है. इसके बाद इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा होनी चाहिए.’
पीएम मोदी राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर दें बयान- जयराम
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘दूसरी मांग यह है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से किए गए चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी, आस्था धोखा के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बयान दें. उन्होंने 5 फरवरी, 2020 को लोकसभा के पटल पर बड़े जोर-शोर के साथ इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी. इसके बाद इस पूरे मामले पर संसद के दोनों सदनों में व्यापक चर्चा होनी चाहिए.’
उन्होंने आगे कहा, ‘विपक्ष ने हमेशा से ही इन दोनों मांगों को नॉन-नेगोशिएबल बताया है. अब मोदी सरकार की तरफ से विपक्ष की एकता और एकजुटता को तोड़ने की आखिरी कोशिश के तहत इन दोनों मांगों को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है. ऐसी कोशिशें कभी सफल नहीं हो पाएंगी.’
राज्यसभा सभापति के निर्देश पर बोले सीपीआई सांसद
वहीं, संसद के मानसून सत्र के 16वें दिन सीपीआई सांसद पी. संदोश ने कहा, ‘यह विपक्ष के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी. हम लगातार यह मांग उठा रहे थे कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं और अपना बयान दें. यह बहुत ही आसान, गंभीर और एक जायज मांग थी. सरकार कई कारणों की वजह से इस मांग को मानने के लिए तैयार थी. आखिरकार अब सभापति जी को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा.’
उन्होंने कहा, ‘राज्यसभा के माननीय सभापति सीपी राधाकृष्णन ने पूरी तरह से स्पष्ट शब्दों में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया कि वे विपक्ष की चिंता के बारे में बताएं कि गृह मंत्री सदन में क्यों मौजूद नहीं है और उनकी गैर-हाजिरी के पीछे क्या कारण है?’ उन्होंने आगे कहा, ‘सभापति जी की तरफ से यह निर्देश दो बार दोहराया गया, यानी यह सदन की कार्यवाही में दर्ज है. इसका यह भी मतलब है कि किरेन रिजिजू को वापस आकर इस पर जवाब देना होगा और हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं.’



