ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, तो ट्रांसपोर्टेशन पर खर्च भी बढ़ा है. ऊपर से बेमौसम बारिश की वजह से फसलों की पैदावार भी प्रभावित हुई हैं, इनसे अब दालों की कीमतों में इजाफा हो रहा है. देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ने के बाद अब दालों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. इससे आम जनता की रसोई का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के मद्देनजर एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बीते 15 दिनों में 7.50 रुपये तक बढ़ गई हैं. वहीं, अब ट्रांसपोर्टेशन और मौसम की मार से दालों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं.
क्यों बढ़ रही हैं दालों की कीमत?
पेट्रोल-डीजल के दाम इन दिनों बढ़े हैं. क्रूड ऑयल महंगा होने से पहले ही आयात महंगा हो गया है. अब देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी का असर मालभाड़े पर पड़ रहा है. ट्रकों का किराया पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है. इससे मंडियों से किराना दुकानों तक दाल पहुंचाने की लागत बढ़ गई है. अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों की वजह से आयात भी महंगा हो गया है इसलिए देश में दालों की कीमतें बढ़ती जा रही हैं.
अभी कितनी है कीमत?
- अरहर 115-150 रुपये
- उड़द 110-140 रुपये
- मूंग 95-130 रुपये
- मसूर 85-110 रुपये
- चना दाल 80-95 रुपये
अरहर के सबसे बढ़े दाम
थोक बाजार में इस समय अरहर के दाल के दामों में सबसे तेजी देखने को मिल रही है. कारोबारियों का कहना है कि थोक बाजार में अरहर दाल 12 फीसदी महंगी होकर 9000-12250 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गई हैं. उत्तर प्रदेश की मंडियों में इसका औसत थोक भाव 10440 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है. वहीं, सिलीगुड़ी जैसी कुछ और बड़ी मंडियों में कीमत अधिकतम 11000 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई हैं.
क्यों अरहर के सबसे ज्यादा उछले दाम?
भारत अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए म्यांमार और अफ्रीकी देशों से बड़े पैमाने पर अरहर दाल आयात करता है. पश्चिम एशिया में तनाव के चलते समुद्री मालभाड़ा इतना अधिक बढ़ गया है कि विदेशों से अरहर दाल भारत आते-आते महंगी होती जा रही है.



