Home छत्तीसगढ़ 4 लाख में फर्जी डोमिसाइल सर्टिफिकेट, CRPF-CISF भर्ती में कोटे का खेल…

4 लाख में फर्जी डोमिसाइल सर्टिफिकेट, CRPF-CISF भर्ती में कोटे का खेल…

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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाकर केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में खुलासा हुआ है कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर बाहरी राज्यों के युवकों को छत्तीसगढ़ निवासी दिखाया जा रहा था. एक प्रमाण पत्र के लिए 3 से 4 लाख रुपये तक वसूले जाते थे.

फर्जी निवास प्रमाण पत्र घोटाले ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि एक अंतरराज्यीय गिरोह 4 लाख रुपए में छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवाकर दूसरे राज्यों के युवकों को CRPF, SSB और CISF जैसी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती कराने का नेटवर्क चला रहा था. इस मामले में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरोह ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर कूटरचित दस्तावेज तैयार करता था और फिर इन दस्तावेजों के आधार पर स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाए जाते थे. मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इसका सीधा संबंध सरकारी भर्ती और आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा हुआ है.

बलरामपुर पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को छत्तीसगढ़ निवासी दिखाकर भर्ती प्रक्रिया में शामिल कराया गया. पुलिस के अनुसार एक फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाने के बदले तीन से चार लाख रुपये तक वसूले जाते थे. प्रारंभिक जांच में बलरामपुर और डोंगरगढ़ क्षेत्र से 20 से 25 फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की आशंका जताई गई है. पुलिस अब उन सभी भर्ती मामलों की भी पड़ताल कर रही है जिनमें इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है.

शिकायत से शुरू हुई जांच, आरक्षक ने फर्जी तरीके से बनाया था सर्टिफिकेट
मामले की शुरुआत 28 अप्रैल 2026 को हुई जब बलरामपुर तहसीलदार ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में बताया गया कि 204 कोबरा बटालियन में पदस्थ एक आरक्षक ने फर्जी तरीके से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र हासिल किया है. जांच में पता चला कि राजस्थान के धौलपुर निवासी सुमित ने दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों में हेरफेर कर अपने नाम से आवेदन किया था.

बर्खास्त आरक्षक से खुला पूरा नेटवर्क, CRPF में नौकरी
पुलिस ने 14 मई को आरोपी सुमित को गिरफ्तार किया था. जांच में सामने आया कि उसने वर्ष 2023 में SSC भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से CRPF में नौकरी हासिल की थी. आरोप है कि उसने छत्तीसगढ़ कोटे और कम कटऑफ का लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया. मामले के उजागर होने के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.

मुरैना से लेकर डोंगरगढ़ तक फैला था नेटवर्क
विवेचना के दौरान पुलिस को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक फैले एक बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली. इसके बाद मुरैना निवासी विवेक सिंह तोमर और आकाश सिंह उर्फ आकाश शर्मा को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि 3 से 4 लाख रुपए लेकर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षणिक दस्तावेज और स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाए जाते थे.

डिस्ट्रिक्ट पोर्टल का हुआ दुरुपयोग, कंप्यूटर सिस्टम और डिजिटल सबूत
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी सिटीजन आईडी बनाकर दस्तावेज अपलोड किए. बाद में उनमें हेरफेर कर आवेदन जमा किए जाते थे. राजनांदगांव जिले के ओमप्रकाश चंद्रवंशी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कंप्यूटर सिस्टम और कई डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं.

भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की तैयारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में केंद्रीय बलों की भर्ती का कटऑफ कई अन्य राज्यों की तुलना में कम रहता है. इसी वजह से बाहरी राज्यों के उम्मीदवार फर्जी दस्तावेजों के जरिए यहां का निवासी बनकर भर्ती का लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे. अब संबंधित केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी जानकारी भेजी जा रही है ताकि ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच हो सके.

सरकारी कर्मचारी के शामिल होने की आशंका
पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने में किसी सरकारी कर्मचारी या एजेंट की भूमिका तो नहीं थी. फिलहाल कोतवाली थाना बलरामपुर में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है.