सरकार के इस नए नियम के तहत उपभोक्ता E20, E22, E25 और E30 जैसे अलग-अलग इथेनॉल ब्लेंड्स में से किसी एक को चुन सकेंगे. इसे शुरू करने की दिशा में काम जारी है.
देश भर के वाहन चालकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, सरकार ‘सुपरमार्केट-स्टाइल चॉइस’ लागू करने की दिशा में काम कर रही है. इसके चलते फ्यूल स्टेशनों में गाड़ी चलाने वालों को अलग-अलग इथेनॉल ब्लेंड वाले पेट्रोल का विकल्प दे सकते हैं, जिससे ग्राहक अपनी गाड़ी की कम्पैटिबिलिटी के आधार पर फ्यूल चुन सकेंगे.
द मिंट ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि सरकार ने तेल कंपनियों को E20, E22, E25 और E30 ईंधन वेरिएंट के लिए डिस्पेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की सलाह दी है. यह कदम ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा नए इथेनॉल मिश्रणों के लिए नियम लागू करने और अप्रैल में सरकार के पूरी तरह से इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति देने के प्रस्ताव के बाद उठाया गया है.
इसके पीछे सरकार का मकसद
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस नियम को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. भारत ने पहले ही 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य हासिल कर लियर है और अब इस नई नीति के जरिए सरकार का लक्ष्य अगले 1-2 साल में (2027-2028 तक) इथेनॉल मिश्रण को बढ़ाकर 25% (E25) और 30% (E30) तक ले जाना है. इससे कच्चे तेल की आयात पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी. पेट्रोल पंपों पर जितना अधिक इथेनॉल का ऑप्शन मिलेगा, उतनी तेजी से तेल का आयात घटता जाएगा. इससे सरकार की अरबों डॉलर की बचत होगी.
इसका एक दूसरा फायदा यह है कि चूंकि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्के और खराब अनाज से बनाया जाता है इसलिए जब पेट्रोल पंपों पर इसकी मांग बढ़ेगी, सरकार को भारी मात्रा में इथेनॉल खरीदना होगा. इसका सीधा फायदा देश के किसानों और चीनी मिलों को होगा. इन्हें इनकी फसलों का सही दाम मिलेगा.
इथेनॉल के फायदे
इथेनॉल के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पेट्रोल के मुकाबले कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसें कम छोड़ता है. इसी के चलते सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी निर्देश दिया है कि अब वे कार और टू-व्हीलर व्हीकल्स के लिए ऐसे इंजन बनाएं, जो E20 से ऊपर यानी कि E25,E27 और E30 ईंधन को भी बिना किसी खराबी के झेल सके.
इथेनॉल के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का यह कदम शहरों में प्रदूषण को कम करने की दिशा में गेम चेंजर साबित होगा. हालांकि, इसके लिए अभी अलग डिस्पेंसिंग सिस्टम, स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लेंडिंग कंट्रोल और फ्यूल क्वालिटी मॉनिटरिंग मैकेनिज्म में निवेश की जरूरत होगी. मिंट से बात करते हुए एक सूत्र ने कहा, “फ्यूल स्टेशनों पर बिकने वाले इथेनॉल-ब्लेंडिंग पेट्रोल की जानकारी डिस्पेंसिंग पंपों पर साफ-साफ दिखानी होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि वे कौन सा फ्यूल खरीद रहे हैं। रिटेल आउटलेट्स को अलग-अलग तरह के फ्यूल पर लेबल लगाना होगा.”



