सरकार ने अप्रैल 2020 में बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए पहली PLI स्कीम शुरू की थी. इसके लिए करीब 40,995 करोड़ का बजट रखा गया था.
अब भारत में अपने मेड इन इंडिया मोबाइल फोन बनाए जाएंगे. इसके लिए भारत सरकार मोबाइल फोन बनाने के लिए लाई गई PLI (Production Linked Incentive) स्कीम का नया वर्जन यानी PLI 2.0 लाने की तैयारी में है. इसका मकसद भारत में मोबाइल फोन के ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स बनवाना है, ताकि विदेशों पर निर्भरता कम हो सके. नई स्कीम में सरकार चाहती है कि मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले कम से कम 55% पार्ट्स भारत में ही बनें. अभी ये आंकड़ा सिर्फ 18-20% के आसपास है.
सरकार की नई योजना
रिपोर्ट्स की मानें तो, सरकार इस नई योजना को 40,000 करोड़ रुपये की इलैक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के साथ जोड़कर लागू करना चाहती है. इससे डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल, चिपसेट और Li-ion बैटरी जैसे जरूरी पार्ट्स की लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल पाएगा.
वित्त मंत्रालय ने जताई चिंता
वित्त मंत्रालय ने चिंता जताई है कि भारत स्मार्टफोन बनाने और एक्सपोर्ट करने में तो आगे बढ़ गया है, लेकिन अब भी कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. इसलिए नई स्कीम में सिर्फ ज्यादा बिक्री पर नहीं, बल्कि लोकल सोर्सिंग और भारत में पार्ट्स बनाने पर ज्यादा फोकस रहेगा. सरकार उन कंपनियों को एक्स्ट्रा फायदा दे सकती है जो भारत में ही जरूरी मोबाइल पार्ट्स बनाएंगी या खरीदेंगी.
साल 2020 में शुरू हुई पुरानी PLI स्कीम के तहत अब तक 32 कंपनियों ने निवेश, उत्पादन और एक्सपोर्ट का टारगेट पार कर लिया है. इस योजना के तहत अब तक:
- 17,519 करोड़ रुपये का निवेश हुआ.
- 11.01 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन हुआ.
- 6.27 लाख करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हुआ.
सरकार को उम्मीद है कि ECMS के तहत मंजूर हुई 75 फैक्ट्रियों में से कई इस साल उत्पादन शुरू कर देंगी, जिससे भारत में मोबाइल पार्ट्स बनाने की रफ्तार और तेज होगी.



