छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमावर्ती क्षेत्र में गड़चिरोली पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में एक और बड़ी सफलता मिली है। भामरागढ़ तहसील के पोमके-बिनागुंडा जंगल क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियार बनाने के फैक्ट्री को सुरक्षाबलो ने ध्वस्त कर दिया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए विशेष अभियान में हथियार बनाने और मरम्मत में उपयोग होने वाली मशीनें तथा अन्य सामग्री बरामद की गई, जिन्हें मौके पर ही ध्वस्त कर दिया गया।
सुरक्षाबलों का अंतिम प्रहार
पुलिस के अनुसार, क्षेत्र मे नक्सली गतिविधियां लगभग समाप्ति की ओर हैं, लेकिन जंगलों में वर्षों पहले छिपाकर रखे गए हथियार और विस्फोटक
सामग्री की तलाश लगातार जारी है। नक्सली सुरक्षा बलों पर हमले और विध्वंसक गतिविधियों के लिए हथियार एवं उपकरण जंगलों में जमीन के नीचे छिपाकर रखते थे। ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ के तहत 16 मई को आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि पोमके-बिनागुंडा क्षेत्र के जंगल में हथियार निर्माण और मरम्मत से जुड़ा सामान छिपाकर रखा गया है।
जंगल से बरामद हुआ हथियार बनाने का सामान
इसके बाद पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में विशेष अभियान
दल, प्राणहिता यूनिट और बम खोजी एवं निष्क्रियकरण दस्ते की संयुक्त टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस ने लेथ मशीन, बीजीएल पाइप, 12 बोर पाइप, इन्वर्टर, जनरेटर, बैटरियां, ग्राइंडिंग और ड्रिलिंग मशीन, जिग सॉ मशीन, प्रेशर पंप और सोलर पैनल सहित बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि इनका उपयोग हथियार निर्माण और मरम्मत में किया जा रहा था।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बरामद सभी सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से नक्सलियों के बचे हुए तकनीकी और रसद नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अभियान को विशेष अभियान दल, प्राणहिता यूनिट और बीडीडीएस के जवानों ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।



