MedicineLoot: डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है. लेकिन कभी-कभी ये डॉक्टर रिश्वत के चक्कर में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिससे आम इंसान को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ये डॉक्टर दवाओं को खरीदने के लिए ऐसे मेडिकल स्टोर का सुझाव देते हैं जो इनके जान-पहचान की होती है.
बीमारी से परेशान लोगों को यहां पर दवाएं चार गुना दामों पर मिलती है. मेडिकल विभाग की इस मुनाफाखोरी की पड़ताल करने के लिए जब मुहिम चलाई तो कई सच्चाई सामने आई है. मुहिम का असर ऐसे हुआ कि यूपी के डिप्टी सीएम ने कहा कि महंगी दवाएं बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, वहीं दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने भी एक्शन की बात कही है.
कई गुना महंगी मिली दवाएं
दवाओं में हो रही मुनाफाखोरी के बारे में पड़ताल करने के लिए टीम ने दिल्ली में होलसेल मार्केट से कुछ दवाइयां खरीदी हैं. इसमें सिपकाल टैबलेट के दो पत्ते, NEFLOX का एक पत्ता, निसिप प्लस टैबलेट का दो पत्ते, ओकामेट के दो पत्ते, पैंटोसेक के पांच पत्ते, पैंटोसेक-DSR के दो पत्ते और REXOF सिरप थे. जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि सिपकाल के 15 टैबलेट वाले पत्ते की MRP 104 रुपए के बेचे जा रहे थे. वहीं होलसेल मार्केट में यही पत्ता 23 रुपए 81 पैसे का बेचा जा रहा था.
सबको मिल रहा मुनाफा
समझिए 100 रुपए की दवा में 75 रुपए का मुनाफा है. सोचिए 23 रुपए में हमें जो 15 टैबलेट का पत्ता मिला उसमें भी होलसेलर का मुनाफा होगा. सिप्ला यानी जिस कंपनी ने दवा बनाई है, उसका मुनाफा भी इसमें है. फिर सवाल ये है कि आखिर सिप्ला ने दवा के पैकेट पर 104 रुपए MRP क्यों लिखे? क्या ये आपकी-हमारी कमाई पर डकैती नहीं है.
यूपी के डिप्टी सीएम ने कही ये बात
दवाओं के दाम को लेकर जब यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से बात की तो उन्होंने कहा कि दवाओं का दाम औसत नियंत्रण के अंतर्गत आता है. मैं औसत नियंत्रण के अधिकारियों से बात करूंगा और कहूंगा जो दवाओं के दाम है वही रखा जाए और जो भी लोग दवाओं को ज्यादा दामों पर बेचते हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ये घोर निंदनीय है और कानूनी रूप से गलत है. इसके अलावा दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि अगर ऐसे मामले की शिकायत मिली तो एक्शन लेंगे.



