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“Kerala Profile: जब Vasco da Gama ने बदला इतिहास, मसालों से सियासत तक की पूरी कहानी”

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दुनिया के तमाम देशों को भारत का रास्ता दिखाने वाले पुर्तगाली वास्कोडिगामा ने साल 1948 में भारत में कदम रखा था। वह जगह कालीकट थी। जिसको वर्तमान समय में कोझिकोड के नाम से जाना जाता है और यह केरल का हिस्सा है।

देश में सबसे ज्यादा शिक्षित आबादी वाला यह राज्य अपने मसालों, प्राकृतिकत विविधता् और तमाम धर्मों के अद्भुत संगम के कारण इसको ‘ईश्वर का देश’ भी कहा जाता है।

देश के पश्चिमी घाट पर बसा यह प्रदेश अपने सुंदर समुद्र तटों, खूबसूरत वादियों, शानदार मौसम और पहाड़ी इलाकों के लिए काफी फेमस है। बैकवॉटर पर बसी पूरी अर्थव्यवस्था, संस्कृति और स्थानीय कला के साथ-साथ यहां पर अनोखे मौसम में पैदा होने वाले मसाले पूरी दुनिया में केरल और भारत की खुशबू को बिखेरते हैं।

केरल के आंदोलन

पूर्व समय में कई धर्मों, विचारों और कारोबारियों का स्वागत कर चुके राज्य में तमाम कुरीतियां भी फैली हुई थीं। इन कुरीतियों के खिलाफ समय-समय पर कई आंदोलन भी हुए। ऐसा ही एक आंदोलन नारायण गुरु की अगुवाई में हुआ। उन्होंने साल 1888 में शिवलिंग स्थापित करके कहा था कि उन्होंने शिव को स्थापिक किया। वह खुद एझावा समुदाय से आते थे, जोकि पिछड़ी जातियों में गिने जाते थे। मौजूदा समय में राज्य में एझावा जातियों का सबसे मजबूत संगठन नारायण गुरु द्वारा शुरू किया है।

इतिहास

मौजूदा स्थिति में दिखने वाला केरल 01 नवंबर 1956 को भारत का राज्य बना था। भारत के आजाद होने के बाद यानी की साल 1947 से 1956 तक केरल अलग-अलग तरह के प्रशासन में रहा। अंग्रेजों के जमाने में तीन अलग क्षेत्रों त्रावणकोर, मालाबार और कोचीन में बंटा हुआ था। त्रावणकोर अब तिरुवनंतपुरम है, कोचीन वर्तमान समय का कोच्चि है और मालाबार में मध्य केरल के अधिकतर तटीय जिले आते हैं। साल 1956 में भाषाई आधार पर राज्य बना।

सियासी सफर

राज्य के गठन के बाद राज्य में मुख्य रूप से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के बीच बारी-बारी से सत्ता का हस्तांतरण रहा है। साल 1957 में EMS नंबूदिरीपाद के नेतृत्व में दुनिया की पहली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार बनी। फिर साल 1957 के पहले विधानसभा चुनाव में राज्य में सीपीआई ने जीत हासिल की, जोकि भारत में ऐतिहासिक घटना थी।

साल 1980 के बाद से केरल में आम तौर पर हर 5 साल में LDF मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में और UDF कांग्रेस के नेतृत्व के बीच सत्ता बदलती रही है। बता दें कि राज्य में दो प्रमुख गठबंधन LDF यानी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, सीपीआई आदि और UDF कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस आदि है।

फिर साल 2016 के विधानसभा चुनाव में ओ. राजगोपाल ने नेमोम निर्वाचन क्षेत्र से जीतकर भारतीय जनता पार्टी का पहला विधायक निर्वाचित किया। जोकि केरल के चुनावी इतिहास में एक अहम मोड़ था। साल 2021 में पिनाराई विजयन के नेतृत्व में LDF ने सत्ता में वापसी की। जिससे साल 1980 के बाद से चली आ रही सत्ता परिवर्तन की परंपरा टूट गई।

विधानसभा और लोकसभा सीटें

केरल राज्य में कुल 20 लोकसभा और 140 विधानसभा सीटें हैं। वहीं 38,863 वर्ग किलोमीटर में फैले इस राज्य में वर्तमान समय में 14 जिले मौजूद हैं। जनसंख्या के आधार पर देखा जाए तो केरल राज्य भारत में 13वें स्थान पर मौजूद है।

लोकसभा सीटें- 14

विधानसभा सीटें – 126

वर्तमान सीएम- हिमंत बिस्वा सरमा

अनुमानित जनसंख्या- 3,12,05,576

अनुमानित पुरुष जनसंख्या- 1,59,39,443

अनुमानित महिला जनसंख्या- 1,52,66,133

साक्षरता दर- करीब 72.19%