शेयर बाजार में बैंकिंग सेक्टर के लिए सोमवार 23 मार्च का दिन काफी खराब रहा. बैंक निफ्टी इंडेक्स में 3% से ज्यादा की तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई. दोपहर तक बैंक निफ्टी करीब 3.2% टूटकर 51,968 के आसपास पहुंच गया. इस गिरावट का असर निजी और सरकारी दोनों तरह के बैंकों पर साफ देखने को मिला. देश के बड़े बैंक भी इस गिरावट से नहीं बच पाए. खासतौर पर HDFC बैंक के शेयरों में लगातार गिरावट देखने को मिली. हाल ही में बैंक के शीर्ष पद पर हुए अचानक बदलाव ने निवेशकों का भरोसा थोड़ा कमजोर किया, जिससे शेयरों पर दबाव बढ़ गया. वहीं, सरकारी बैंकों जैसे यूनियन बैंक, केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के शेयरों में भी 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.
कच्चे तेल की कीमतें बनी बड़ी वजह
इस गिरावट के पीछे एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं. ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल भी लगभग 99 डॉलर के करीब रहा. जब तेल महंगा होता है, तो देश के लिए आयात महंगा हो जाता है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ता है. इसका सीधा असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ता है क्योंकि उधार लेना महंगा हो जाता है.
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
एक और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली है. मार्च महीने में ही उन्होंने अरबों डॉलर के भारतीय शेयर बेच दिए हैं. खास बात यह है कि उन्होंने सबसे ज्यादा पैसा बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर से निकाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह सेक्टर बड़ा है और इसमें शेयरों को बेचना आसान होता है.
क्यों सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग सेक्टर पर?
बैंकिंग सेक्टर में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा होती है. जब वे पैसा निकालते हैं, तो इसका असर तेजी से दिखता है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के चलते निवेशक जोखिम कम करना चाहते हैं, इसलिए वे तेजी से पैसा निकाल रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते और बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक बैंकिंग शेयरों में दबाव बना रह सकता है. हालांकि, लंबे समय के निवेशकों के लिए यह गिरावट मौके में भी बदल सकती है.



