Home देश असम में JMM ने छोड़ा ‘हाथ’ का साथ, क्या हेमंत सोरेन का...

असम में JMM ने छोड़ा ‘हाथ’ का साथ, क्या हेमंत सोरेन का ‘एकला चलो’ वाला दांव बिगाड़ेगा कांग्रेस का खेल?

3
0

Assam Assembly Elections 2026:

पूर्वोत्तर के राज्य असम में चुनावी पारा चढ़ते ही एक बड़ी सियासी हलचल देखने को मिली है। झारखंड में साथ मिलकर सरकार चलाने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के रास्ते असम की धरती पर अलग हो गए हैं। सीट बंटवारे को लेकर मची खींचतान के बाद अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी ने अकेले ही चुनावी समर में उतरने का बड़ा फैसला लिया है। यह न केवल असम के समीकरणों को बदल सकती है, बल्कि इसका सीधा असर आने वाले समय में झारखंड की अंदरूनी राजनीति पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। काफी समय से कयास लगाए जा रहे थे कि विपक्षी दल एक मजबूत गठबंधन के साथ बीजेपी के सामने खड़े होंगे। इसी सिलसिले में रांची से लेकर दिल्ली तक बैठकों का कई दौर चला। खुद असम कांग्रेस के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई ने हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी। बात यहीं नहीं रुकी, सोरेन खुद दिल्ली जाकर कांग्रेस आलाकमान से भी मिले, लेकिन हफ्तों की माथापच्ची के बाद भी सीटों के गणित पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। अंततः, झामुमो ने हार मानकर अपने 19 उम्मीदवारों की सूची फाइनल कर दी है और उन्हें पार्टी का पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ भी सौंप दिया गया है।

अब किसके भरोसे झामुमो की नई रणनीति

झामुमो की इस अकेले चलने की जिद के पीछे एक सोची-समझी चुनावी रणनीति छिपी है। पार्टी का मुख्य ध्यान असम के उन इलाकों पर है जहां चाय बागानों में काम करने वाले लोग और आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं। इन समुदायों के साथ पार्टी का पुराना जड़ाव रहा है और उसे उम्मीद है कि यह वोट बैंक उसे जीत दिलाने में मदद करेगा। माजबत विधानसभा सीट से प्रीति रेखा बरला और सोनारी से बलदेव तेली जैसे चेहरों को उतारकर झामुमो ने यह साफ कर दिया है कि वह पूरी तैयारी के साथ मैदान में है। हालांकि, उसने विपक्षी एकजुटता का एक छोटा संदेश देते हुए बिहाली की सीट वामदलों (CPIML) के लिए छोड़ दी है।

झारखंड में भी दिखेगा इस दरार का असर

असम की इस टूट का असर केवल वहीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी तपिश झारखंड की राजनीति में भी महसूस की जाएगी। जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से दोनों दलों के बीच तल्खी बढ़ सकती है, जिसका असर आगामी राज्यसभा चुनावों पर पड़ेगा। झारखंड में जल्द ही राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं। अभी तक माना जा रहा था कि एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है, लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि झामुमो दोनों ही सीटों पर अपना दावा ठोक सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड की सत्ता में साझेदार ये दो दल इस कड़वाहट को रांची की गलियों तक पहुंचने से कैसे रोकते हैं।

क्या सोरेन का दांव हो पाएगा सफल?

असम में चुनावी बिगुल बज चुका है और 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। राज्य की 126 सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में फिलहाल बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है, जिसने 2021 के चुनाव में 60 सीटें जीती थीं। अब जब विपक्षी एकता में सेंध लग चुकी है, तो आम मतदाता के मन में सवाल है कि क्या झामुमो अपने दम पर वोट काटकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगी या खुद के लिए एक नया आधार खड़ा करेगी। 4 मई को जब चुनावी नतीजे आएंगे, तभी पता चलेगा कि हेमंत सोरेन का यह साहसी फैसला कितना सही साबित हुआ।