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वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे: जानें इस आनुवंशिक विकार के बारे में;वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे का महत्व…

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हर साल 21 मार्च को ‘वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे’ मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लाखों लोगों और उनके परिवारों को इस विकार के प्रति जागरूक करना है। लेकिन सवाल यह है कि इस दिन कोa क्यों चुना गया? दरअसल, 21 तारीख का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि गर्भ में 21वें क्रोमोसोम की अतिरिक्त कॉपी के कारण बच्चे इस बीमारी का शिकार होते हैं। डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है।

डाउन सिंड्रोम की पहचान

आपको याद होगा कि आमिर खान ने अपनी फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ में डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों की समस्याओं को दर्शाया था, जिससे इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ी है। डाउन सिंड्रोम बच्चे के शारीरिक विकास और सीखने की क्षमताओं को प्रभावित करता है। सही जानकारी और सतर्कता से इस विकार से काफी हद तक बचा जा सकता है।

डाउन सिंड्रोम क्या है?

डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है, जो गर्भावस्था के दौरान जेनेटिक परिवर्तनों के कारण होता है। यह तब होता है जब किसी व्यक्ति के शरीर में 21वें क्रोमोसोम की अतिरिक्त कॉपी मौजूद होती है। डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं होता।

डाउन सिंड्रोम के प्रकार

इस विकार के तीन प्रमुख प्रकार हैं, जो क्रोमोसोम 21 की अतिरिक्त कॉपी के जुड़ने के तरीके पर निर्भर करते हैं:

  • ट्राइसॉमी 21: यह सबसे सामान्य प्रकार है, जिसमें सभी कोशिकाओं में 21वें क्रोमोसोम की तीन कॉपी होती हैं।
  • ट्रांसलोकेशन: यह एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें 21वें क्रोमोसोम का पूरा या आंशिक हिस्सा किसी अन्य क्रोमोसोम से जुड़ा होता है।
  • मोजेक: यह डाउन सिंड्रोम का सबसे दुर्लभ प्रकार है, जिसमें कुछ कोशिकाओं में ही अतिरिक्त क्रोमोसोम होता है।

डाउन सिंड्रोम के लक्षण

डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों में कुछ विशेष शारीरिक लक्षण हो सकते हैं:

  • चेहरा और नाक चपटी हो सकती है, कान छोटे और जीभ बाहर निकली हुई हो सकती है। आंखों का कोना ऊपर की ओर झुका हो सकता है।
  • गर्दन के पीछे अतिरिक्त त्वचा, जोड़ों में लचीलापन और मांसपेशियों की कमजोरी देखी जा सकती है।
  • बच्चों का कद सामान्य से छोटा हो सकता है और उन्हें बोलने में कठिनाई हो सकती है।

स्वास्थ्य समस्याएं

डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों को कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे:

  • दिल की बीमारियाँ
  • दृष्टि में कमी
  • सुनने में कठिनाई
  • थायरॉयड समस्याएं
  • सांस से संबंधित समस्याएं
  • कान में संक्रमण
  • नींद की समस्याएं
  • उम्र से पहले अल्जाइमर
  • डाउन सिंड्रोम से बचाव

जन्म से पहले:

गर्भावस्था के दौरान रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड द्वारा डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है।

जन्म के बाद:

शारीरिक लक्षणों और कैरियोटाइप नामक लैब परीक्षण से डाउन सिंड्रोम की पुष्टि की जा सकती है।

जागरूकता का महत्व

‘वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे’ के अवसर पर इस विकार के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। इससे रोग की पहचान में मदद मिलती है और प्रभावित लोग खुशहाल जीवन जी सकते हैं। हमें इन लोगों का सम्मान करना और सहयोग देना चाहिए।