Home देश फरवरी में सब्जियों की खेती: किसानों के लिए सुनहरा अवसर…

फरवरी में सब्जियों की खेती: किसानों के लिए सुनहरा अवसर…

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फरवरी का महीना देशभर के किसानों के लिए आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस समय मौसम का तापमान न तो बहुत ठंडा होता है और न ही अत्यधिक गर्म।

इस संतुलित मौसम में किसानों के लिए नई संभावनाएं खुलती हैं।

सही मिट्टी की तैयारी

यदि आप भिंडी, करेला और खीरा जैसी अगेती सब्जियों की खेती करने का विचार कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपने खेत की अच्छी तरह से जुताई करें। इससे मिट्टी को धूप मिलेगी और हानिकारक कीट व रोग समाप्त हो जाएंगे।

इसके साथ ही, मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए जैविक खाद का उपयोग करें। प्रति एकड़ लगभग 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता और जल-धारण क्षमता में सुधार होगा।

भिंडी की खेती और बीज उपचार

भिंडी की फसल के लिए फरवरी का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। बीजों को 12 से 15 घंटे तक पानी में भिगोकर छाया में सुखाएं और फिर थायरम या कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें।

बीज उपचार से फंगल रोगों का खतरा कम होता है। बुवाई के समय पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें। संतुलित पोषण और नियमित सिंचाई से भिंडी की फसल तेजी से बढ़ती है।

खीरे की खेती में ड्रिप सिंचाई

खीरा एक नकदी फसल है, जिसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। खीरे की खेती के लिए खेत में मेड़ या उठे हुए बेड तैयार करें और प्रति स्थान पर 2 से 3 बीज डालें।

अंकुरण के बाद एक स्वस्थ पौधा छोड़कर बाकी को हटा दें। खेत में नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप सिंचाई या मल्चिंग तकनीक का उपयोग करें।

करेले की मचान विधि से खेती

करेले की बाजार में हमेशा मांग रहती है, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। करेला ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन सुधारने और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है।

करेले के बीजों को हल्का कुरेदकर 10 से 12 घंटे पानी में भिगो दें। इसके बाद मचान विधि का उपयोग करें और जैविक कीट नियंत्रण का ध्यान रखें।