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विरोध…हिंसा और FIR! DU में यूजीसी नियमों पर भिड़े दो पक्षों के बीच अब तक क्या-क्या हुआ?

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13 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन ने नए नियमों को नोटिफाई किया और इसके साथ ही देशभर के विश्वविद्यालयों में एक वर्ग विशेष के द्वारा विरोध की चिंगारी भड़क उठी. कई राज्यों में प्रदर्शन हुए, बहस छिड़ी और कानून में बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं.

दिल्ली विश्वविद्यालय में भी इस नए नियम को लेकर प्रदर्शन हो चुके थे, लेकिन 13 फरवरी को जो कुछ के नॉर्थ कैंपस में हुआ, उसने इस विवाद को नए और अब तक के सबसे बड़े बवाल में बदल दिया.

आखिर उस दिन कैंपस में ऐसा क्या हुआ कि मामला सड़क से थाने तक पहुंच गया. दो पक्षों के बीच टकराव कैसे बढ़ा और अब तक किन-किन मोड़ों से गुजर चुका है यह पूरा घटनाक्रम. आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं पूरा मामला.

क्या है पूरा मामला?

13 फरवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्ट्स फैकल्टी में UGC के नए जाति-आधारित भेदभाव विरोधी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, जो राजनीतिक विवाद में बदल गया. छात्र संगठन AISA ने अपने कार्यकर्ताओं को धमकियां मिलने का आरोप लगाया, जबकि एक यूट्यूबर महिला ने छेड़छाड़ और मारपीट का दावा किया है. पुलिस ने 14 फरवरी को दोनों तरफ से FIR दर्ज कर ली है.

पुलिस के मुताबिक दोनों पक्षों से शिकायतें मिली हैं और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए CCTV फुटेज खंगाली जा रही है. जहां जरूरत पड़ी, वहां मेडिकल जांच भी कराई गई है. अधिकारियों ने बताया कि BNS की धारा 74, 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत क्रॉस FIR दर्ज की गई है.

इन धाराओं में महिला की मर्यादा भंग करने की नीयत से हमला, चोट पहुंचाना, गलत तरीके से रोकना और समान इरादे से अपराध शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल जांच जारी है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.

क्या हैं AISA के आरोप?

AISA ने आधिकारिक बयान में कहा कि आंदोलन के दौरान कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की. संगठन का आरोप है कि यूट्यूबर महिला पहले से विवादित छवि रखती हैं और उन्होंने एक दलित पत्रकार को परेशान किया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया. AISA का दावा है कि वायरल वीडियो में यूट्यूबर महिला एक पत्रकार पर हमला करती और फिर एक कार्यकर्ता को घूंसा मारती दिख रही हैं.

दूसरी ओर यूट्यूबर महिला ने कहा कि वह एक पत्रकार के तौर पर प्रदर्शन कवर करने पहुंची थीं. उनका आरोप है कि भीड़ ने उनसे जाति बताने की मांग की और फिर हमला किया. उन्होंने दावा किया कि दो महिलाओं ने उनके हाथ पकड़े, किसी ने पीछे से गला दबाया और कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई. तिवारी के मुताबिक उन्हें रेप और नग्न घुमाने की धमकियां भी दी गईं.

शिकायत दर्ज कराने पहुंचे दोनों पक्षों में थाने के बाहर भी तकरार

AISA का कहना है कि जब कार्यकर्ता मॉरिस नगर थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद भीड़ ने गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दीं. संगठन का आरोप है कि कई घंटों तक कार्यकर्ताओं को थाने के अंदर ही रोके रखा गया. बाहर कथित तौर पर उकसाने वाले नारे भी लगाए गए.

पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी है. पुलिस का कहना है कि वीडियो साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा और कथित छेड़छाड़ की जिम्मेदारी किस पक्ष पर बनती है.

DU के कुलपति का बयान

DU के कुलपति प्रोफेसर योगेश ने यूनिवर्सिटी में हुए टकराव की निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद चिंताजनक है और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए. अनेकता में एकता की बात करते हैं, मिलजुल कर रहने की बात करते हैं, लेकिन यदि इंसान को इंसान समझना ही बंद कर दें तो किताबें पढ़ने का कोई अर्थ नहीं रह जाता. उन्होंने कहा कि अगर हम किसी बच्ची की आंखों की बेबसी नहीं समझ पाए तो फिर हमारी शिक्षा और समझ का क्या अर्थ रह जाएगा. इस घटना पर चिंता और दुख व्यक्त करना जरूरी है.