भारत सरकार ने हाल ही में सिविल सेवकों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने यूनियन सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों के लिए एक विस्तृत स्कोरकार्ड सिस्टम लागू किया है।
इस नई व्यवस्था के तहत अब अधिकारियों का मूल्यांकन केवल आकलन से नहीं, बल्कि तय मानकों के आधार पर अंकों के जरिए किया जाएगा। कैबिनेट सचिवालय की ओर से शुरू की गई इस प्रणाली में मेरिट और लापरवाही दोनों को स्पष्ट मापदंडों पर परखा जाएगा।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों को 100 अंकों के पैमाने पर आंका जाएगा। इसमें दर्जनों पैरामीटर शामिल हैं। खास बात यह है कि इस रिपोर्ट कार्ड में नेगेटिव मार्किंग और डिस्क्रेशनरी मार्क्स की भी व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर सरकारी कामकाज में देरी खत्म करने पर जोर दे चुके हैं। इसी दिशा में यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
सरकार का कहना है कि उचित मूल्यांकन से नागरिकों, बिजनेस और स्टार्टअप को इजाजत, ग्रांट और लाइसेंस जैसी प्रक्रियाओं में तेजी मिलेगी। कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन ने सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2025 के लिए तैयार पहला प्रशासनिक रिपोर्ट कार्ड जनवरी 2026 में सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों को भेज दिया है।
क्या होंगे मानदंड?
मूल्यांकन के मानकों में फाइल निपटान को सबसे ज्यादा 20 अंक दिए गए हैं। इसके बाद आउटपुट और गतिविधियों को 15 अंक तथा योजनाओं और कैपिटल प्रोजेक्ट्स पर खर्च को भी 15 अंक का वेटेज दिया गया है। अन्य मानकों में जन शिकायत निवारण, कैबिनेट नोट की तैयारी, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप द्वारा मॉनिटर किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स की समय पर पूर्ति, और पे एंड अकाउंट्स ऑफिस तथा चीफ कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स द्वारा बिलों की समय पर मंजूरी शामिल हैं।
नेगेटिव मार्किंग भी मिलेगी
इस रिपोर्ट कार्ड में 12 नेगेटिव अंक का प्रावधान है। ये अंक विदेशी दौरों या आयोजनों पर अत्यधिक खर्च, सचिव स्तर पर फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने और माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज को भुगतान में देरी जैसी स्थितियों में दिए जा सकते हैं। इसके अलावा 5 डिस्क्रेशनरी अंक का भी प्रावधान रखा गया है, जिन्हें कैबिनेट सचिव किसी सेक्रेटरी या डिपार्टमेंट के असाधारण कार्य या विशेष योगदान के लिए दे सकते हैं।



