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पॉक्सो दोषी ने लिखे निबंध, सर्टिफिकेट देखकर हाईकोर्ट ने कम कर दी सजा…

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POCSO के दोषी यानी बच्ची से दरिंदगी करने के दोषी के सर्टिफिकेट्स को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा कम करने का फैसला लिया है। खबर है कि अदालत ने जेल में रहते हुए निबंध लिखने समेत कई कार्यक्रमों में भाग लेने के चलते उसकी उम्रकैद की सजा को 12 साल में बदल दिया है।

हालांकि, अदालत ने अन्य कुछ बातों पर भी ध्यान देते हुए यह फैसला दिया है। दोषी ने 5 साल की बच्ची को शिकार बनाया था।

रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने सजा कम करने की कई वजहें बताई हैं। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपी ने अपराध किया, तो उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। कोर्ट ने कहा, ‘इस बात पर गौर करना भी जरूरी है कि आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया गया। कोविड-19 के दौरान भी नहीं।’ कोर्ट ने जेल में रहते हुए तीन सर्टिफिकेट हासिल करने की बात पर भी विचार किया है।

इनमें एक कार्यक्रम में शामिल होने पर पुणे स्थित तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ से मिला सर्टिफिकेट शामिल है। उसे दूसरा सर्टिफिकेट एक निबंध प्रतियोगिता में शामिल होने के बाद मुंबई के रामचंद्र प्रतिष्ठान से मिला था। तीसरा सर्टिफिकेट उसने महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन करने के लिए मुंबई सर्वोदय मंडल से हासिल किया था। कोर्ट ने आदेश में कहा कि उसने इससे जुड़ी परीक्षा भी पास की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच ने कहा, ‘इन सभी बातों पर विचार करने के बाद उसकी सजा में हम कुछ नरमी दिखा रहे हैं।’ जजों ने यह भी कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने 10 साल से ज्यादा की सजा सुनाई है।

क्या था मामला

अपराध के समय आरोपी की उम्र 20 साल थी। वह घाटकोपर चाल का रहने वाला था और उसने अपने पड़ोसी की पांच साल की बेटी को निशाना बनाया था। दिसंबर 2016 में वारदात को अंजाम दिया गया था और साल 2020 में उसे दोषी करार दिया गया। ताजा सुनवाई में हाईकोर्ट को पॉक्सो कोर्ट की तरफ से दोषी माने जाने में कोई गलती नहीं दिखी।