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सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ किसानों का बिगुल : विचारपुर–पंडरिया भाठा में महापंचायत, ज़मीन वापसी और आंदोलन जारी रखने का ऐलान

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खैरागढ़–छुईखदान–गंडई। क्षेत्र में प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्री परियोजना को रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को विचारपुर–पंडरिया भाठा में विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में हजारों की संख्या में महिला–पुरुष किसानों की भागीदारी रही, जहां एक स्वर में परियोजना के विरोध और जमीन वापसी की मांग उठी।

तीन अहम फैसले: जमीन वापसी, आंदोलन जारी, मंदिर निर्माण

महापंचायत में किसानों ने सर्वसम्मति से तीन बड़े निर्णय लिए। पहला निर्णय यह रहा कि सीमेंट कंपनी द्वारा किसानों से खरीदी गई जमीन उसी कीमत पर वापस ली जाए। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे कंपनी को पूरी राशि लौटाने को तैयार हैं और इस प्रक्रिया में प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। यह भी तय हुआ कि यदि जमीन बेचने वाला किसान उसे वापस नहीं लेना चाहे, तो प्राथमिकता गांव के किसी अन्य किसान को दी जाएगी।

दूसरा निर्णय यह लिया गया कि जब तक प्रस्तावित सीमेंट परियोजना पूरी तरह रद्द नहीं होती, तब तक आंदोलन और विरोध लगातार जारी रहेगा। किसानों ने एकजुटता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के दबाव में न आने का संकल्प लिया।

तीसरे निर्णय के तहत महापंचायत स्थल पर हनुमान मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया। पहले ही दिन मंदिर निर्माण हेतु एक-एक रुपये के दान का आह्वान किया गया, जिसमें अभूतपूर्व समर्थन मिला।

₹2.58 लाख से अधिक दान, 55 गांवों की मिट्टी से नींव

किसान अधिकार संघर्ष समिति के संरक्षक गिरवर जंघेल, अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल एवं संयोजक सुधीर गोलछा ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए पहले दिन ही ₹2,58,153 की राशि एकत्रित हुई, जो मुख्य रूप से एक-एक रुपये के सिक्कों और छोटे नोटों के रूप में आई। यह राशि किसानों की सामूहिक आस्था और एकजुटता का प्रतीक मानी जा रही है।

इसके साथ ही 55 गांवों से किसानों द्वारा अपने खेतों की मिट्टी लाकर मंदिर की नींव में डाली गई। विशेष रूप से वृंदावन और प्रयागराज की पवित्र मिट्टी भी इस अवसर पर लाई गई, जिसे नींव में शामिल किया गया। किसानों ने इसे आंदोलन की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता से जोड़कर देखा।

निर्माण समिति गठित, 2 अप्रैल को प्राण-प्रतिष्ठा

महापंचायत में मंदिर निर्माण के लिए समिति का गठन किया गया, जिसमें वीरेंद्र जंघेल (विचारपुर) को निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। निर्णय लिया गया कि मंदिर का प्रारंभिक निर्माण तुरंत शुरू किया जाएगा और 2 अप्रैल, हनुमान जयंती के दिन मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। उसी दिन इसी स्थल पर फिर से महापंचायत और विशाल भंडारे का आयोजन होगा।

राजनीति से दूरी, केवल किसान हित सर्वोपरि

सभा में यह भी स्पष्ट किया गया कि आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध की चर्चा नहीं की गई। वक्ताओं ने कहा कि किसानों के संघर्ष का श्रेय कोई व्यक्ति या दल नहीं ले, यह केवल किसानों की सामूहिक लड़ाई है।

29 तारीख को ज्ञापन सौंपने की तैयारी

महापंचायत में लिए गए निर्णयों के संबंध में किसान अधिकार संघर्ष समिति द्वारा 29 तारीख को प्रशासन को लिखित ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। फरवरी और मार्च में प्रत्येक गांव से प्रतिनिधियों की बैठकों के माध्यम से आंदोलन की रणनीति को और मजबूत किया जाएगा। महापंचायत में मोती लाल जंघेल, राजकुमार जंघेल, मन्नू चंदेल, संजू जंघेल, रमेश साहू, श्रवण जंघेल, कामदेव जंघेल, प्रमोद सिंह, मुकेश पटेल, बीरेंद्र जंघेल, केदार जंघेल, मंगलू राम साहू, अमर साहू, प्रियंका जंघेल, लक्की जंघेल, पवन जंघेल, कुमार यादव, सजन साहू, लेख राम आदि किसान उपस्थित रहे l