राजनांदगांव। राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री फूलोदेवी नेताम ने केंद्र सरकार पर मजदूर विरोधी और गरीब विरोधी नीतियों को लागू करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म कर देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूरों से काम का संवैधानिक अधिकार छीन लिया है।
आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) कांग्रेस सरकार की ऐतिहासिक देन रही है, जिसने देश के सबसे गरीब परिवारों को सम्मानजनक रोजगार दिया। लेकिन मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर लोकसभा में बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को कमजोर कर दिया। उनका कहना है कि यह सिर्फ योजना में बदलाव नहीं बल्कि गरीब मजदूरों से उनका अधिकार छीनने की साजिश है।
फूलोदेवी नेताम ने बताया कि पहले मनरेगा एक केंद्रीय कानून था, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी। लेकिन नया ढांचा लागू कर केंद्र-राज्य हिस्सेदारी 60:40 कर दी गई है। इसके तहत राज्य को पहले अपनी 40% राशि जमा करनी होगी तभी केंद्र फंड जारी करेगा।
उन्होंने कहा कि राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है, ऐसे में यह व्यवस्था धीरे-धीरे मनरेगा को बंद करने का रास्ता खोल सकती है। इसके अलावा मोदी सरकार अब राज्यों पर V.B.G.RAM.G. (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन) के नाम पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है। इससे राज्य सरकारें मजबूर होकर या तो काम घटाएंगी या मजदूरों को रोजगार देना ही बंद कर देंगी।
फूलोदेवी ने भाजपा के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के 70% गांवों में अघोषित रूप से काम बंद है। मोदी सरकार के 11 सालों में राष्ट्रीय औसत सिर्फ 38 दिन रोजगार रहा, एक भी साल 100 दिन काम नहीं दिया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में मनरेगा ने करोड़ों गरीब परिवारों को भुखमरी से बचाया। लेकिन अब इसे खत्म करना साबित करता है कि यह सरकार गरीब मजदूरों के खिलाफ है।
फूलोदेवी ने कहा कि अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़े काम के अधिकार पर आधारित था। लेकिन नया फ्रेमवर्क इसे कंडीशनल स्कीम और केंद्र द्वारा नियंत्रित योजना में बदल देता है। इसके तहत पूरा साल काम मांगने का अधिकार, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और पंचायत के माध्यम से स्थानीय काम तय करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा। मजदूरी का 40% बोझ अब राज्य सरकार पर होगा और मेट एवं रोजगार सहायकों की भूमिका भी समाप्त हो जाएगी।
प्रेसवार्ता में पूर्व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता किशन खंडेलवाल, पूर्व विधायक भूनेश्वर बघेल, पूर्व महापौर हेमा देशमुख, कुतुबुद्दीन सोलंकी, ग्रामीण अध्यक्ष विपिन यादव, शहर अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार, नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले, राजेश कुमार चंपू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद रहे।



