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छत्तीसगढ़ : मुंबई से लौट रहे दो प्रवासी श्रमिकों की मौत, ओडिशा जाने वाले सभी मार्ग सील…

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में रविवार देर शाम दो प्रवासी श्रमिकों की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। दोनों श्रमिक मुंबई से बस में लौट रहे थे और उन्हेें पश्चिम बंगाल जाना था। भिलाई में जहां श्रमिक ने रास्ते में दम तोड़ दिया, वहीं महासमुंद के पिथौरा में अस्पताल ले जाने के दौरान मजदूर की मौत हो गई। दोनों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। दूसरी ओर मलकानगिरी में कोरोना संंक्रमण के 8 मामले सामने आने के बाद ओडिशा जाने वाले सभी मार्ग को सील कर दिया गया है। शबरी नदी के किनारे भी सुरक्षाबल तैनात किया गया है। संक्रमित मिले मरीजों में एक नर्स भी है, जो सुकमा के दोरनापाल सीमा से सटे इलाके में पदस्थ है।

मलकानगिरी में एक साथ 8 नए केस आने के बाद दोरनापाल से सटे ओडिशा बाॅर्डर को इसी तरह से सील किया गया ।

स्कूल में या फिर घर-घर जाकर बांटा जाएगा मिडडे मील

स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों को मध्याह्न भोजन के लिए सूखा राशन देने के बंदोबस्त किए हैं। इसके लिए आदेश जारी कर दिया गया है। सभी स्कूली बच्चों के पालकों को घर पहुंचाकर या फिर स्कूल बुलाकर राशन वितरित किया जाएगा। साथ ही रसोइयों को इस दौरान कुकिंग कॉस्ट भी नहीं देने का निर्णय लिया है। वहीं, चावल, दाल व तेल समेत अन्य किसी भी प्रकार के खाद्यान्न के लिए तय की गई मात्रा में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने देने का आदेश दिया है। साथ ही पालकों वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करने को कहा गया है। 

किसान-मजदूर के पास पैसा आने से नहीं होगी मंदी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश के किसानों, मजदूरों और वनवासियों की जेब में पैसा आने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूती होगी। उन्होंने कहा, किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिले, इसके लिए किसान न्याय योजना शुरू की है। इस योजना से प्रदेश के 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ रुपए 4 किश्तों में दिया जा रहा है। दलहन-तिलहन उत्पादक और भूमिहीन किसानों को भी इस योजना में शामिल करेंगे। वर्तमान में 90 प्रतिशत से अधिक औद्योगिक प्रतिष्ठान शुरू हो चुके हैं। जो व्यवसाय शहरी मजदूरों को रोजगार देते हैं हमारी कोशिश है कि वो जल्दी से जल्दी खुले। 

वनोपज संग्रहण से आदिवासियों को मिलेंगे 25 सौ करोड़
लाॅकडाउन के बावजूद भी अभी करीब 26 लाख मजदूर मनरेगा में काम कर रहे हैं। जिनके पास जॉब कार्ड मनरेगा का नहीं है उसको भी तत्काल कार्ड बनेगा। दूसरी तरफ लघु वनोपज संग्राहक वनवासियों से तेंदुपत्ता, महुआ, इमली की खरीदी की शुरुआत की है। जंगल में रहने वाले हमारे भाई बहन हैं उनकी जेब में 2500 करोड़ रुपए आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान, मजदूर और  आदिवासी जो वनांचल में रहते हैं। इन सबकी जेब में पैसा आएगा। इनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी तो ग्रामीण व्यवसाय हो या शहर का बढ़ेगा ही। देश में मंदी का दौर रहा, लेकिन छत्तीसगढ़ में कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इस वर्ष भी ऐसा होगा।

कवर्धा : कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कंटेनमेंट जोन घोषित ग्राम पुटपुटा के क्वारैंटाइन सेंटर में रुके 14 श्रमिक शनिवार देर रात भाग गए। रविवार सुबह उनके फरार होने की सूचना मिली। भागे हुए श्रमिक अपने गांव-घर में छिपे थे। 14 में से 11 श्रमिकों को पकड़कर वापस क्वारैंटाइन सेंटर लाया गया, जबकि 3 श्रमिक अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। क्वारैंटाइन सेंटर से भागे 14 में से 7 श्रमिक ग्राम चाटा, 6 श्रमिक आमाटोला और 1 डोकरी घटिया का रहने वाला है। गांव पहुंचने पर इन्हें पुटपुटा में बने प्राइवेट स्कूल में क्वारैंटाइन किया गया था। 14 दिन का समय पूरा करने के बावजूद इन्हें छुट्टी नहीं दी जा रही थी। 

राजनांदगांव के गंडई के भुरभुसी में बनाए गए क्वारैंटाइन सेंटर में रखे गए मजदूर शराब पार्टी कर रहे थे। उन्होंने टिक-टॉक पर इसका वीडियो भी पोस्ट किया। इसके बाद मामला दर्ज किया गया है। 

राजनांदगांव :  क्वारैंटाइन सेंटर में कुछ लोगों ने शराब पार्टी करते हुए पहले टिक-टॉक वीडियो बनाया फिर इसे सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिया। मामले की जानकारी जैसे ही पंचायत और आसपास के लोगों को लगी शिकायत थाने पहुंची। मामला गंडई के भुरभुसी का है। यहां स्कूल को क्वारैंटाइन सेंटर बनाया गया है। जहां 22 मई की रात पांच मजदूर शशि साहू, राधे साहू, होलेंद्र यादव, नीलेश साहू और परेटन साहू ने सेंटर के भीतर ही जमकर शराब पार्टी की। शराब पीते हुए इन मजदूरों ने टिक-टॉक वीडियो भी बना लिया। रात में ही इसे अलग-अलग वाट्सएप ग्रुप में पोस्ट किया। सुबह पंचायत प्रतिनिधियों और गांव के अन्य लोगों को वीडियो वायरल होने की जानकारी मिली। 

बिलासपुर : बिल्हा ब्लॉक के रहंगी और मुड़पार गांव के क्वॉरैंटाइन सेंटर में मजदूर मुसीबत में हैं। कमरे नहीं होने के कारण मजदूर सीढ़ी, बरामदे व कार्यक्रम मंच पर पसरे हुए हैं। रहंगी सेंटर में श्याम कुमार और संतोष का परिवार लू के थपेड़ों के बीच मासूम बच्चों को लेकर खुले मंच पर पड़ा रहा। मजदूरों की नियमित रूप से किसी के स्वास्थ्य की जांच नहीं हो रही है। वहीं मुड़पार ग्राम पंचायत स्कूल बिल्डिंग में 144 मजदूर रखे गए हैं। 30 मजदूर बच्चों के साथ दिन और रात बरामदे में पड़े रहते हैं। 10 दिन हो गए हर मजदूर से 7-7 किलो चावल मंगा कर उन्हीं से खाना पकवाया जा रहा है। मजदूरों ने बताया कि सरपंच के कहने पर सभी ने अपने अपने घरवालों से पंचायत में चावल जमा करवाया है। 

बिलासपुर के बिल्हा ब्लॉक के रहंगी और मुड़पार गांव के क्वॉरैंटाइन सेंटर में मजदूरों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। खुले में पड़े हैं और खाने के लिए घर से राशन का इंतजाम करना पड़ रहा है। 

जशपुरनगर : सन्ना के क्वारैंटाइन सेंटर में युवक की पिटाई सिर्फ इसलिए कर दी गई क्यों कि उसने तहसीलदार से साफ पानी देने की मांग की थी। सन्ना के क्वारैंटाइन सेंटर में ग्रीन जोन गढ़वा से आए परिवार को रखा गया है। पीड़ित रितेश गुप्ता ने बताया कि तीन दिन गुजरने के बाद भी उसका अब तक टेस्ट नहीं किया गया है। सेंटर में पीने का पानी गंदा दिखने पर उसने जानकारी तहसीलदार को दी थी। इस पर उन्होंने ब्लीचिंग पावडर का इस्तेमालकर स्वच्छ पानी की व्यवस्था करने के लिए पंचायत से कहा था, पर तहसीलदार के जाते ही रोजगार सहायक बंसत पाठक ने आक्रोशित होकर क्वारैंटाइन सेंटर में निवासरत रितेश गुप्ता की जमकर पिटाई कर दी।