इस साल मानसून पहले से ही कमजोर रहा है। अगस्त और सितंबर में बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज हुई।
बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। इससे आने वाले महीनों में पीने के पानी और सिंचाई का संकट गहरा सकता है। जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून का असर पहले से ही खरीफ फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है।
इस साल मौसम ने बार-बार अपना रौद्र रूप दिखाया है।
पहले भयानक गर्मी पड़ी। फिर मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने कहर बरपाया। अब मौसम वैज्ञानिकों ने साल के आखिरी महीनों के लिए भी बड़ी चेतावनी दी है।
फरवरी 2027 तक रहेगा असर
यह पहली बार है जब उसके पूर्वानुमान इतने स्पष्ट रहे हैं। संगठन का कहना है कि फरवरी 2027 तक यह बदलाव बहुत तेज़ी से बने रहने की आशंका लगभग तय है। यह घटना साल 2026 के आखिर तक अपने सबसे मजबूत रूप में पहुंचेगी।
भारत पर क्या पड़ेगा असर
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह खबर बड़ी चिंता की है। मौसम एजेंसी स्काईमेट, इस बार सर्दी सामान्य से कम रहेगी। तापमान ज़्यादा रहने से गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों पर असर पड़ सकता है।



