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केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्मार्ट मीटर लगाने में तेजी लाने के निर्देश…

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उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लग सकती है, उनके लिए फिलहाल राहत की कोई खबर नहीं है। केंद्र का फरमान, बिजली बिल घटाना है तो खपत पर नजर रखें उपभोक्ता, स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इन्हें लगाने का काम नहीं रुकेगा।

केंद्रीय निर्देश में कहा गया है कि जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को भारतीय मानकों के स्मार्ट मीटर से बिजली देना जरूरी है। यानी घर हो, दुकान हो या दूसरी श्रेणी का कनेक्शन, नियम के दायरे में आने वाले उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाया जाना है।

केंद्र ने एक और बात साफ की है। स्मार्ट मीटर लगाना जरूरी है, लेकिन उसका भुगतान तरीका अलग हो सकता है। उपभोक्ता प्रीपेड या पोस्टपेड व्यवस्था में रह सकता है। मतलब मीटर लगेगा, उसके बाद भुगतान की व्यवस्था तय होगी। इसे स्मार्ट मीटर से बचने का रास्ता नहीं माना जाएगा।

सरकार का तर्क है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत पर नजर रखना आसान होगा। उपभोक्ता देख सकेगा कि वह कब और कितनी बिजली खर्च कर रहा है। आगे समय के हिसाब से अलग बिजली दर का फायदा भी मिल सकता है। महंगे समय में कम और सस्ते समय में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करके बिल घटाया जा सकता है। यानी बिल कम करने के लिए मीटर नहीं, इस्तेमाल का तरीका बदलना होगा।

स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच बैकुंठपुर का मामला भी सामने आया है। वहां स्मार्ट मीटर और चेक मीटर की रीडिंग में अंतर बताया गया था। जांच में पता चला कि चेक मीटर की मैनुअल रीडिंग दर्ज करते समय गलती हुई थी। 7 अगस्त को चेक मीटर की वास्तविक रीडिंग 2777 यूनिट थी, जबकि पहले 2589 यूनिट दर्ज हो गई थी।

27 जुलाई से 7 अगस्त के बीच स्मार्ट मीटर की खपत 302 यूनिट और चेक मीटर की खपत 303 यूनिट निकली। दोनों में केवल एक यूनिट का अंतर था। रीडिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग भी जांची गई। जांच में स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी नहीं मिली। उलटे मैनुअल रीडिंग में इंसानी गलती की संभावना सामने आई।

केंद्रीय मंत्रालय ने राज्यों से सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने का काम बिना रोक-टोक जारी रखने को कहा है। छत्तीसगढ़ में भी इसी दिशा में काम तेज किया जा रहा है। बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और सही जानकारी के लिए अधिकृत माध्यम देखने को कहा है।

स्मार्ट मीटर पर सरकार का जोर साफ है, लेकिन उपभोक्ताओं की चिंता भी उतनी ही साफ है। उन्हें मीटर से ज्यादा बढ़ते बिजली बिल की चिंता है। अब कंपनी को यह भरोसा दिलाना होगा कि नया मीटर केवल रीडिंग बदलने वाला उपकरण नहीं, बल्कि बिलिंग में सचमुच पारदर्शिता लाने का जरिया है।