अडानी ग्रुप एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्ज जुटाने की तैयारी में है। गौतम अडानी की अगुवाई वाला समूह करीब 2.5 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाने की योजना बना रहा है। इस रकम का इस्तेमाल अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी के अधिग्रहण के लिए लिए गए पुराने कर्ज को रीफाइनेंस करने में किया जाएगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह डील पूरी हो जाती है तो यह 2026 में भारत की सबसे बड़ी ऑफशोर लोन डील बन सकती है। खास बात यह है कि समूह पूरी रकम एक साथ जुटाने के बजाय इसे अलग-अलग हिस्सों में लेने की तैयारी कर रहा है। इससे कंपनी को कर्ज की लागत को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
दो हिस्सों में जुटाई जाएगी 2.5 अरब डॉलर की रकम
रिपोर्ट के अनुसार, अडानी परिवार के स्वामित्व वाली मॉरीशस स्थित कंपनी Endeavour Trade and Investment Ltd करीब 1.5 अरब डॉलर का ब्रिज लोन लेने की तैयारी कर रही है। इस लोन की अवधि 18 से 24 महीने के बीच हो सकती है। इसकी ब्याज दर अमेरिकी बेंचमार्क SOFR से करीब 1.50 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान है। बाद में इस ब्रिज लोन को भारतीय बैंकों से रुपये में लिए जाने वाले कर्ज के जरिए रीफाइनेंस किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में SBI और HDFC Bank समेत कई घरेलू बैंकों के शामिल होने की संभावना है।
Adani Infra जुटाएगी 1 अरब डॉलर
फंडिंग प्लान का दूसरा हिस्सा करीब 1 अरब डॉलर का है। अडानी परिवार की एक अन्य कंपनी Adani Infra (India) Ltd पांच साल की अवधि वाला लोन लेने की तैयारी में है। यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक के External Commercial Borrowing (ECB) नियमों के तहत लिया जा सकता है। इसकी ब्याज दर SOFR से करीब 2.75 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान है। दोनों प्रस्तावित कर्ज को मिलाकर अडानी ग्रुप करीब 2.5 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है।
इन बड़े बैंकों से चल रही बातचीत
फंडिंग को लेकर अडानी ग्रुप की कई बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ बातचीत जारी है। इनमें DBS Group Holdings, MUFG, Sumitomo Mitsui Banking Corporation (SMBC) और Standard Chartered जैसे बैंक शामिल बताए जा रहे हैं। मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, अगले दो से तीन सप्ताह में बैंकों के साथ डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं, लोन प्रक्रिया अक्टूबर के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। अगर यह सौदा तय समय पर पूरा होता है, तो यह 2026 में भारत की सबसे बड़ी ऑफशोर लोन डील बन सकती है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले इस साल Adaniconnex का 1.13 अरब डॉलर का कर्ज बड़ी ऑफशोर लोन डील में शामिल रहा है।
सस्ते विदेशी कर्ज का फायदा उठाने की रणनीति
अडानी ग्रुप की इस पूरी योजना में आरबीआई की विदेशी मुद्रा से जुड़ी स्वैप सुविधा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसका उद्देश्य रुपये पर दबाव कम करने के साथ विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने वाली कंपनियों के लिए हेजिंग लागत को कम करना है। ग्रुप दो अलग-अलग हिस्सों में फंडिंग जुटाकर विदेशी और घरेलू बाजारों में उपलब्ध लिक्विडिटी का फायदा उठाना चाहता है। इससे बदलती क्रेडिट परिस्थितियों के बीच कर्ज की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
Ambuja Cement और ACC के अधिग्रहण के लिए लिया था कर्ज
अडानी ग्रुप ने अंबुजा सीमेंट्स और ACC को खरीदने के लिए 2023 में करीब 3.5 अरब डॉलर का फंडिंग पैकेज जुटाया था। अब इसी पुराने कर्ज को रीफाइनेंस करने के लिए समूह नई फंडिंग जुटाने की तैयारी कर रहा है। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, मौजूदा 2.5 अरब डॉलर के रीफाइनेंसिंग प्लान के बाद 2027 में करीब 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग भी जुटाई जा सकती है। यानी सीमेंट कारोबार के अधिग्रहण के लिए लिए गए कर्ज को समूह चरणबद्ध तरीके से रीफाइनेंस करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
अमेरिकी मामलों के बीच विस्तार पर फोकस
अडानी ग्रुप की यह बड़ी फंडिंग योजना ऐसे समय सामने आई है, जब समूह की भारत और विदेश में विस्तार योजनाओं पर भी फोकस बढ़ा है। अमेरिकी मामलों से जुड़ी चुनौतियों के बीच समूह अब अपने कारोबार के विस्तार और वित्तीय संरचना को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में Adani Airport Holdings Ltd ने भी बुधवार को करीब 9,825 करोड़ रुपये यानी लगभग 1 अरब डॉलर जुटाने की योजना की घोषणा की। कंपनी यह रकम Temasek Holdings और BlackRock से जुड़े फंड्स वाले एक कंसोर्टियम को हिस्सेदारी बेचकर जुटाने की तैयारी में है।



