छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री खेल उत्कृष्टता मिशन सहित पांच मिशनों पर काम कर रही है, जिसके लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
साय ने राष्ट्रीय खेल दिवस और हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर यहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित राज्य खेल पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार राज्य में खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें निखारने के लिए प्रतिबद्ध है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना नहीं बल्कि प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, खेल अधोसंरचना और बड़े मंचों पर प्रतिस्पर्धा के अवसर उपलब्ध कराने वाली एक व्यापक व्यवस्था विकसित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पांच मिशनों पर काम कर रही है, इनमें ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कृष्टता मिशन’ भी शामिल है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
बयान के अनुसार, इस अवसर पर साय ने वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए 126 उत्कृष्ट खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को राज्य खेल पुरस्कार प्रदान किए। इसके अलावा 540 अन्य खिलाड़ियों को भी नकद प्रोत्साहन राशि दी गई।
इस तरह कुल 666 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को पुरस्कार और नकद राशि के रूप में कुल 1.74 करोड़ रुपये प्रदान किए गए।
साय ने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और मैदान पर किया गया संघर्ष केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं होता बल्कि उनकी सफलता से पूरे राज्य और देश का गौरव बढ़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची जारी की गई है, जिससे उन्हें सरकारी सेवा में नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ है।
साय ने कहा, ‘‘इससे राज्य के युवाओं में खेल को करियर के रूप में अपनाने का विश्वास मजबूत होगा।’’
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत इस बात की है कि ऐसी प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अवसर उपलब्ध कराए जाएं और उचित प्रशिक्षण दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी उद्देश्य से राज्य में पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है।
साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक के पहले संस्करण में 1.65 लाख युवाओं ने भाग लिया था, जबकि दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर 3.91 लाख हो गई।
उन्होंने कहा कि राज्य में आधुनिक खेल अधोसंरचना का तेजी से विकास किया जा रहा है, इसके तहत जशपुर के कुनकुरी, रायगढ़ और रायपुर में खेल परिसरों का निर्माण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया, “तीरंदाजों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नवा रायपुर में करीब 67 करोड़ रुपये की लागत से तीरंदाजी अकादमी बनाई जा रही है। इसके अलावा जशपुर के पंडरापाट में करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से एक अन्य अकादमी विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) समुदाय के पहाड़ी कोरवा लोगों में मौजूद प्राकृतिक तीरंदाजी प्रतिभा को निखारना है।”
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक विविधता विभिन्न खेलों के लिए अनुकूल है।
साव के पास खेल एवं युवा कल्याण विभाग भी है।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है कि इन प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें निखारा जाए और पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं।’’ साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।



