कामिका एकादशी का महत्व
सावन के महीने में आने वाली कामिका एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने से बड़े से बड़े पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। सावन का महीना होने के कारण भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त होती है।
भगवान शिव का कल्याणकारी स्वरूप
कल्याणकर्ता शिव: सनातन धर्म में ‘हरि’ (भगवान विष्णु) और ‘हर’ (भगवान शिव) को एक ही परम सत्य के दो रूप माना जाता है। संतों ने इन दोनों के संयुक्त स्वरूप को ‘हरिहर’ कहकर पूजा की है। कल्याणकर्ता शिव वास्तव में एक ही परम ब्रह्म के दो भिन्न आयाम हैं, और शैव तथा वैष्णव मतों में कोई भेद नहीं है।
ग्रंथों में एकत्व का वर्णन
ग्रंथों में इस एकत्व का वर्णन: शैव और वैष्णव परंपराओं में कई ग्रंथों में इस एकत्व का उल्लेख मिलता है।
एक प्रसिद्ध भाव
एक प्रसिद्ध भाव: “शिवाय विष्णुरूपाय, विष्णवे शिवरूपिणे। शिवस्य हृदयं विष्णुः, विष्णोश्च हृदयं शिवः॥”
विष्णु जी की योगनिद्रा
विष्णु जी योगनिद्रा: सावन का महीना चातुर्मास में आता है, जब विष्णु जी योगनिद्रा में होते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथ में होता है।



