– किसान लगातार कर रहे खाद का उठाव’
– अब तक 17205 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण’
– सहकारी समितियों में अब तक 7236 क्विंटल बीजों का भंडारण’
– किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने हरी खाद को भी किया जा रहा प्रोत्साहित’
राजनांदगांव। जिले के किसानों द्वारा जून माह में मानसून की आहट के साथ ही खरीफ फसलों की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। आगामी खरीफ मौसम में जिले में लगभग 1.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न खरीफ फसलों की बोनी संभावित है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए 1 अप्रैल से ही सहकारी समितियों में भंडारण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में 45650 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 18500 मीट्रिक टन यूरिया, 4000 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी), 3600 मीट्रिक टन म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) तथा विभिन्न प्रकार के 9800 मीट्रिक टन एनपीके उर्वरकों का लक्ष्य शामिल है। लक्ष्य के विरूद्ध अब तक जिले में 12000 मीट्रिक टन से अधिक यूरिया, 365 मीट्रिक टन से अधिक सिंगल सुपर फॉस्फेट, 2755 मीट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश तथा लगभग 3000 मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। किसानों द्वारा खरीफ सीजन की तैयारी के साथ लगातार उर्वरकों का उठाव किया जा रहा है और अब तक 17205 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। इसके बावजूद जिले में 12584 मीट्रिक टन उर्वरक शेष उपलब्ध है, जो जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता को दर्शाता है।
इसी प्रकार खरीफ 2026 के लिए धान सहित विभिन्न दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिए 14331 क्विंटल बीज की मांग का आंकलन किया गया है। इसके विरूद्ध अब तक 7236 क्विंटल बीजों का भंडारण सहकारी समितियों में किया जा चुका है। किसानों द्वारा लगातार बीजों का उठाव किया जा रहा है तथा अब तक 1533 क्विंटल बीजों का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा प्राकृतिक रूप से नत्रजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हरी खाद को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत जिले में 350 क्विंटल मूंग बीज तथा 100 क्विंटल धैचा बीज का भंडारण किया गया है, जिससे किसान हरी खाद के रूप में इनका उपयोग कर भूमि की उत्पादकता में वृद्धि कर सकें। कृषि विभाग द्वारा किसानों से खरीफ फसलों की बुआई के लिए आवश्यक खाद एवं बीज का समय पर उठाव करने तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करने की अपील की है।



