आज दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। एक ओर जहां संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों द्वारा ‘संसद चलो’ मार्च का आयोजन किया जाना था।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी। सुरक्षा कारणों से संसद मार्ग के आसपास धारा 163 लागू कर दी गई है और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.
दिल्ली कूच और संसद मार्च का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत के इतिहास में कई बार किसान, छात्र, और सामाजिक संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की ओर मार्च किया है। इनमें से कई आंदोलनों ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया, जबकि कुछ अपनी प्रमुख मांगों को पूरा कराने में असफल रहे हैं.
महत्वपूर्ण आंदोलनों की सूची
1988 महेंद्र सिंह टिकैत किसान आंदोलन: 25 अक्टूबर 1988 को नई दिल्ली में एक बड़ी किसान पंचायत आयोजित की गई थी, जिसमें 14 राज्यों के किसान शामिल हुए। लगभग 5 लाख किसानों ने विजय चौक से इंडिया गेट तक कब्जा कर लिया था, जिसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार को किसानों की मांगों पर विचार करना पड़ा.
2018 किसान मुक्ति संसद: 2018 में रामलीला मैदान में ‘किसान मुक्ति मार्च’ का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों किसान शामिल हुए। उन्होंने कर्ज माफी और फसलों के उचित दाम की मांग की.
2020-21 किसान दिल्ली चलो: नवंबर 2020 में केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन शुरू किया। यह आंदोलन लगभग 13 महीने तक चला और अंततः सरकार को तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने पर मजबूर होना पड़ा.
2023 पहलवान आंदोलन: 2023 में पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया। नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन उन्होंने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया.
2024 किसान दिल्ली चलो 2.0: 2024 में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर फिर से ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया, लेकिन उन्हें दिल्ली में प्रवेश नहीं मिला.
2026 CJP ‘संसद चलो’ मार्च
आज, 20 जुलाई 2026 को कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा ‘संसद चलो’ मार्च का आयोजन किया जाना था। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी और सुरक्षा बढ़ाते हुए प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोक दिया। पुलिस ने रविवार शाम को एक एडवाइजरी जारी कर किसी भी प्रकार के मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया.



