, सरकार बदल रही यह नियम
यह व्यवस्था सालों से चली आ रही है. लेकिन अब सरकार इस सिस्टम को फिर से देखने पर विचार कर रही है. सरकार की ओर से बनाई गई एक हाई-लेवल कमेटी ने मंत्रालय को सुझाव दिया है.
देश में नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सरकार अब उन गाड़ियों की समीक्षा कर रही है जिन्हें अभी तक टोल प्लाजा पर टैक्स नहीं देना पड़ता है. इस बदलाव का असर यह हो सकता है कि आने वाले समय में कई ऐसे सरकारी वाहन और अधिकारी भी टोल टैक्स देने लगें, जिन्हें अब तक यह सुविधा मुफ्त में मिलती रही है.
अभी मौजूदा व्यवस्था के तहत कुछ खास लोगों और गाड़ियों को टोल टैक्स से छूट दी जाती है. इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट के जज, सांसद और कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की गाड़ियां शामिल हैं. इसके अलावा कई सरकारी विभागों की गाड़ियां भी नेशनल हाईवे पर बिना टोल दिए सफर करते हैं.
सरकार सिस्टम को बदलने पर कर रही विचार
यह व्यवस्था सालों से चली आ रही है. लेकिन अब सरकार इस पूरे सिस्टम को फिर से देखने पर विचार कर रही है. सरकार की ओर से बनाई गई एक हाई-लेवल कमेटी ने सड़क परिवहन मंत्रालय को सुझाव दिया है कि टोल-फ्री गाड़ियों की लिस्ट को पूरी तरह खत्म या बेहद कम कर दिया जाए. बाकी कई कैटेगरी में आने वाली गाड़ियों को भी आम लोगों की तरह टोल देना चाहिए. इससे सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और संतुलित बन सकता है.
केवल इन लोगों को मिल सकती है छूट
सूत्रों के मुताबिक, देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जज, केंद्रीय मंत्री, एमपी, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस, पैरामिलिट्री और कृषि सामानों वाले ट्रक को टोल में छूट मिलेगी.
क्या है सरकार के इस फैसले के पीछे वजह?
सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण रेवेन्यू बढ़ाना भी है. नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के निर्माण और रखरखाव पर सरकार भारी खर्च करती है. टोल टैक्स इसी खर्च को पूरा करने में मदद करता है. अगर टोल फ्री गाड़ियों की संख्या कम की जाती है, तो सरकार को ज्यादा आय होगी, जिसे नई सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में लगाया जा सकता है.
हाल के सालों में देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से बढ़ा है और नए-नए एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं. ऐसे में इन प्रोजेक्ट्स की लागत भी बहुत ज्यादा है. इसलिए सरकार चाहती है कि टोल कलेक्शन सिस्टम को और मजबूत और प्रभावी बनाया जाए, ताकि सड़क निर्माण के लिए लगातार फंड मिलता रहे.



