आज यानी 25 मई 2026 से नौतपा की शुरुआत हो गई है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव आज दोपहर 3 बजकर 37 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इसके बाद सूर्य 8 जून 2026 को दोपहर 1 बजकर 33 मिनट तक इसी नक्षत्र में रहेंगे.
धार्मिक और लोक परंपराओं में सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी अवधि के शुरुआती 9 दिनों को नौतपा कहा जाता है. मान्यता है कि इन दिनों धरती पर गर्मी अपने चरम पर पहुंचती है और इसका सीधा प्रभाव मौसम, स्वास्थ्य और आने वाले मानसून पर भी देखने को मिलता है.
नौतपा शब्द का अर्थ ही है, नौ दिनों की तपन. भारतीय ज्योतिष और लोक परंपरा में यह माना जाता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब पृथ्वी पर सूर्य की किरणों का प्रभाव अधिक तीव्र हो जाता है. यही कारण है कि इस दौरान लू, तेज धूप और तापमान में वृद्धि देखने को मिलती है. कई क्षेत्रों में लोग इसे वर्षा के संकेतों से भी जोड़कर देखते हैं. कहा जाता है कि यदि नौतपा अच्छी तरह तपे, तो आगे चलकर मानसून भी बेहतर होता है.
नौतपा का प्रभाव कब तक?
इस बार नौतपा का प्रभाव 25 मई से 2 जून 2026 तक रहेगा. मौसम विशेषज्ञ भी उत्तर भारत के कई राज्यों में हीटवेव और तेज गर्मी की संभावना जता रहे हैं. दोपहर के समय बाहर निकलने पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को खास ध्यान रखने की जरूरत है. शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए.
धार्मिक दृष्टि से भी नौतपा का समय विशेष माना जाता है. इस दौरान सूर्य देव की उपासना, जल दान और मटका दान का महत्व बढ़ जाता है. मान्यता है कि नौतपा में जरूरतमंदों को ठंडा जल, छाता, फल और मिट्टी का घड़ा दान करने से पुण्य प्राप्त होता है. कई लोग इस दौरान सुबह सूर्य को अर्घ्य देकर आदित्य हृदय स्तोत्र और गायत्री मंत्र का जाप भी करते हैं.
ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार नौतपा केवल मौसम परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के संतुलन और जीवन की ऊर्जा से भी जुड़ा हुआ समय माना जाता है. यही कारण है कि भारत में सदियों से नौतपा को केवल गर्मी नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जाता रहा है.



