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Election Results 2026: PM मोदी ने जहां झालमुड़ी खाई वहां बीजेपी आगे! कैसे 5 बड़े फैक्टर्स ने पलट दिया ममता का खेल’

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Election Results 2026: 5 दिन पहले 5 एग्जिट पोल्स ने बंगाल में बीजेपी को जीत दी थी. आज मतगणना के साथ अंदाजे सच साबित होते दिख रहे हैं. इसकी वजह हैं बीजेपी के 5 जादुई फैक्टर्स, जो TMC पर भारी पड़ गए.

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर काउंटिंग जारी है. शुरुआती रुझानों में बीजेपी को 160 और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 177 सीटों पर बढ़त मिली हुई है. भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी को पीछे कर दिया है. गौरतलब है कि PM मोदी ने बंगाल में जहां-जहां झालमुड़ी खाई थी, उन सभी 4 सीटों (झाड़ग्राम, बिनपुर, गोपीबल्लभपुर और नयाग्राम) पर बीजेपी को फायदा मिल रहा है. दरअसल, बीजेपी ने इस बार ममता को हराने के लिए 5 बड़े फैक्टर्स पर काम किया. इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तो 15 दिनों तक बंगाल में डेरा ही डाल लिया था.

बीजेपी ने इस बार बेहद सधी हुई और बंगाल की जमीनी सच्चाई से मेल खाती रणनीति अपनाई. इन 5 फैक्टर्स ने खेल पलटने का काम किया:

फैक्टर– 1. ‘मछलीभातकी राजनीति को ही मुद्दा बना लिया

ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार में आरोप लगाया कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो ‘माछे-भाते बंगाली’ (मछली और चावल खाने वाले बंगाली) की पहचान खत्म कर देगी और शाकाहारी संस्कृति थोप देगी. बीजेपी ने इस हमले को बंगाल की ‘शाक्त परंपरा’ से जोड़कर काउंटर किया, जहां मछली को ‘महाप्रसाद’ का दर्जा दिया जाता है. अनुराग ठाकुर जैसे बीजेपी के बड़े नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मछली-चावल खाकर यह संदेश दिया कि बीजेपी का हिंदुत्व बंगाल की थाली और संस्कृति के बिल्कुल अनुकूल है और यह हर बंगाली का अधिकार है. चाहे वह किसी भी पार्टी को वोट दे.

फैक्टर– 2. ‘काबाबनाममां कालीका सांस्कृतिक नैरेटिव खड़ा किया

TMC सांसद सयानी घोष के मुस्लिम बहुल इलाकों में ‘मेरे दिल में है काबा और मेरी आंखों में मदीना’ गीत गाने का वीडियो वायरल हुआ. अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं ने इसे ‘काली बनाम काबा’ की सीधी लड़ाई में बदल दिया. बीजेपी ने कहा कि TMC का दिल काबा-मदीना में हो सकता है, लेकिन बंगाल के दिल में केवल मां काली और मां दुर्गा बसती हैं. बीजेपी ने हिंदी पट्टी के अपने ‘जय श्री राम’ नारे को बंगाल में जानबूझकर ‘जय मां काली’ से जोड़कर खुद को बंगाली अस्मिता के और करीब लाने की कोशिश की.

फैक्टर– 3. महिला वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए दोगुनी मदद और आरक्षण का वादा

ममता बनर्जी ने ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना के तहत महिलाओं को 1000 रुपये (बढ़ाकर 1500 रुपये) की योजना में विस्तार किया. इसे काटने के लिए बीजेपी ने सत्ता में आने पर हर महीने 3,000 रुपये देने का ऐलान किया, जो ममता की योजना से दोगुना है. इसके साथ ही चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण को जल्दी लागू करने के लिए बिल लाने की कोशिश की. इससे यह संदेश गया कि बीजेपी महिलाओं को सत्ता में 33% हिस्सेदारी दे रही है, जबकि TMC समेत विपक्ष इसका विरोध कर रहा है. PM मोदी ने यह वादा किया कि बीजेपी सरकार आने पर महिलाएं रात 2 बजे भी बेखौफ निकल सकेंगी. बीजेपी ने ममता की उस सलाह को काटा जिसमें उन्होंने महिलाओं को रात में बाहर न निकलने को कहा था.

फैक्टर– 4. 91 लाख वोटरों के नाम काटने की SIR प्रक्रिया कोशुद्धिकरण अभियानके रूप में भुनाया

चुनाव से पहले हुई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में बंगाल की मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए. कुल मतदाता 11.8% घटकर 7.66 करोड़ से 6.75 करोड़ रह गए. सबसे ज्यादा नाम मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना जैसे मुस्लिम बहुल और TMC के मजबूत गढ़ वाले जिलों से कटे. बीजेपी ने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक कवायद न बताकर अवैध घुसपैठियों और ‘ब्लैक वोट्स’ के खिलाफ ‘शुद्धिकरण अभियान’ के रूप में पेश किया. बीजेपी ने तर्क दिया कि TMC ने इन घुसपैठियों को अपना वोट बैंक बनाने के लिए संरक्षण दे रखा था.

फैक्टर– 5. 15 साल की सत्ता विरोधी लहर और संगठनात्मक रणनीति में बड़ा बदलाव

2011 से लगातार 15 साल की सत्ता के कारण पैदा हुई एंटी-इनकम्बेंसी और भ्रष्टाचार के आरोपों से निपटने के लिए बीजेपी ने इस बार सीधे व्यक्तिगत हमले बंद कर दिए. ममता बनर्जी की जगह पूरे सिस्टम और ‘सिंडिकेट राज’ को निशाने पर लिया. साथ ही, 2021 की हार से सबक लेते हुए पार्टी ने माइक्रो-मैनेजमेंट पर पूरा जोर दिया. अमित शाह ने 15 दिन बंगाल में कैंप कर ‘3 AM ब्लूप्रिंट’ के तहत सभी 80,719 बूथों का डेटा विश्लेषण किया और ‘पन्ना प्रमुख’ प्रणाली लागू की. एक कार्यकर्ता को 30-60 मतदाताओं को बूथ तक लाने की जिम्मेदारी दी गई. बाहरी नेता थोपे जाने के पुराने आरोप को खत्म करने के लिए इस बार स्थानीय चेहरों को आगे रखा गया और यह घोषणा की गई कि ‘बीजेपी का मुख्यमंत्री बंगाल की मिट्टी का बेटा ही होगा’.